कर्नाटक

हासन स्कूल की बदहाली 172 छात्र टिन शेड में रहने को मजबूर

Kavita2
6 Sept 2026 10:52 AM IST
हासन स्कूल की बदहाली 172 छात्र टिन शेड में रहने को मजबूर
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कर्नाटक : हासन जिले के शांतिग्राम स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर रेजिडेंशियल स्कूल की बदहाल स्थिति ने सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से पिछड़े और दलित बच्चों की शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बीच इस स्कूल की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

पिछले पांच वर्षों से इस स्कूल के 172 छात्र-छात्राएं एक छोटे से टिन शेड में रहने और पढ़ने को मजबूर हैं। यहां कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

टिन शेड में चल रही पढ़ाई और आवास व्यवस्था

जानकारी के अनुसार, शांतिग्राम स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर रेजिडेंशियल स्कूल में कुल 172 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 92 छात्र और 80 छात्राएं शामिल हैं।

स्कूल के लिए स्थायी भवन की व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले पांच सालों से विद्यार्थियों को टिन शेड में रहना पड़ रहा है। इसी जगह पर कक्षाएं लगती हैं, भोजन तैयार किया जाता है और बच्चों के रहने की व्यवस्था भी की गई है।

एक ही स्थान पर पढ़ाई, खाना और रहने की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी, बारिश और अन्य मौसम में टिन शेड में रहना बच्चों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

किराए पर खर्च हो रहे लाखों रुपये

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि समाज कल्याण विभाग इस टिन शेड के लिए हर महीने करीब 1.8 लाख रुपये किराए के रूप में भुगतान कर रहा है।

इसके बावजूद बच्चों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय से किराया देने के बाद भी स्कूल के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान में जल्द सुधार की जरूरत है।

शौचालय सुविधा की गंभीर समस्या

स्कूल में सबसे बड़ी समस्या शौचालय व्यवस्था को लेकर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, 92 छात्रों के लिए केवल पांच शौचालय उपलब्ध हैं।

वहीं, 80 छात्राओं के लिए अलग और सुरक्षित शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। इससे छात्राओं को रोजाना परेशानी और असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में खासकर छात्राओं के लिए बेहतर शौचालय और स्वच्छता सुविधाएं होना जरूरी है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकार लगातार वंचित वर्गों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे करती रही है। लेकिन इस स्कूल की स्थिति सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।

शिक्षा के लिए केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

छात्रों को हो रही परेशानियां

विद्यार्थियों को एक छोटे से स्थान में पढ़ाई और रहने की व्यवस्था के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्रों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती, पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है और दैनिक जीवन की जरूरतों को पूरा करने में भी परेशानी आती है। खासकर छात्राओं के लिए अलग सुविधाओं की कमी बड़ी समस्या बनी हुई है।

स्थायी भवन की मांग

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द स्कूल के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराए।

उनका कहना है कि जब बच्चों की शिक्षा और भविष्य की बात आती है तो बुनियादी सुविधाओं से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। लंबे समय तक टिन शेड में स्कूल चलाना विद्यार्थियों के साथ अन्याय है।

प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल

मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर स्थिति सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।

एक ओर सरकार वंचित वर्गों के बच्चों को आगे बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में इस तरह की समस्याएं व्यवस्था की कमियों को उजागर करती हैं।

फिलहाल हासन के शांतिग्राम स्थित अंबेडकर रेजिडेंशियल स्कूल की स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।

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