कर्नाटक

गन्ने का MSP 6,000 रुपये प्रति टन करने की मांग, मंत्री सतीश जारकीहोली ने केंद्र से की अपील

Kavita2
7 Oct 2026 10:43 AM IST
गन्ने का MSP 6,000 रुपये प्रति टन करने की मांग, मंत्री सतीश जारकीहोली ने केंद्र से की अपील
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने केंद्र से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति टन करने की मांग की है। राज्य के मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि गन्ने की कीमत तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है, इसलिए अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को ही लेना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेज चुकी है और किसानों के हित में कीमत बढ़ाने की मांग लगातार उठाती रही है।

जारकीहोली ने कहा कि राज्य सरकार हर साल केंद्र से गन्ने के MSP में बढ़ोतरी की मांग करती रही है, लेकिन अपेक्षित स्तर पर कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और ऐसे में मौजूदा कीमत किसानों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही। इसी वजह से राज्य सरकार ने 6,000 रुपये प्रति टन का प्रस्ताव रखा है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों की मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत के लिए तैयार है। यदि केंद्र सरकार किसानों और चीनी मिलों के बीच चर्चा के बाद राज्य सरकार को किसी बैठक में आमंत्रित करती है, तो राज्य सरकार उसमें शामिल होगी। उन्होंने कहा कि अभी तक केंद्र की ओर से इस तरह की किसी बैठक के लिए औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है।

जारकीहोली के मुताबिक प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब चीनी मिलों और किसानों के बीच किसी तरह की सहमति बनेगी। उन्होंने कहा कि अभी इसके लिए समय है और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत जारी रह सकती है। उनका कहना है कि राज्य सरकार किसानों की चिंताओं को समझती है और केंद्र के सामने उनका पक्ष रखने के लिए तैयार है।

गन्ना किसानों के लिए कीमत का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। किसानों का कहना है कि खाद, डीजल, मजदूरी, सिंचाई और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में गन्ने की कीमत भी उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए। कई किसान संगठन समय-समय पर गन्ने के बेहतर दाम की मांग करते रहे हैं।

राज्य सरकार की ओर से 6,000 रुपये प्रति टन की मांग इसी पृष्ठभूमि में की गई है। सरकार का मानना है कि यदि किसानों को बेहतर कीमत मिलती है तो उनकी आय में सुधार होगा और गन्ना उत्पादन से जुड़ी आर्थिक परेशानियां कुछ हद तक कम हो सकती हैं।

दूसरी ओर, चीनी मिलों का पक्ष भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। मिल प्रबंधन उत्पादन लागत, चीनी की बाजार कीमत, परिवहन खर्च और अन्य वित्तीय पहलुओं को ध्यान में रखकर गन्ना खरीद मूल्य पर चर्चा करते हैं। यही वजह है कि सरकार किसानों और चीनी मिलों के बीच समझौते को अहम मान रही है।

सतीश जारकीहोली ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर एकतरफा फैसला नहीं कर सकती। चूंकि गन्ने की कीमत निर्धारण का अधिकार केंद्र के पास है, इसलिए राज्य सरकार अपनी ओर से प्रस्ताव भेज सकती है और केंद्र से मांग कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र के स्तर पर ही होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की मांगों को लेकर राज्य सरकार का रुख स्पष्ट है। यदि केंद्र कोई संयुक्त बैठक बुलाता है तो राज्य सरकार अपने सुझाव और किसानों की समस्याएं सामने रखेगी। इससे कीमत निर्धारण की प्रक्रिया में राज्य का पक्ष भी दर्ज हो सकेगा।

गन्ने की कीमत बढ़ाने का सवाल केवल किसानों की आमदनी से ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है। कर्नाटक के कई जिलों में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। चीनी मिलों, परिवहन, मजदूरी और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ता है।

इसी कारण कीमत में बदलाव का असर व्यापक होता है। किसानों को अधिक कीमत मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ सकती है, लेकिन मिलों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के फैसले में सभी पक्षों के हितों का संतुलन जरूरी होता है।

इस बीच, जारकीहोली ने मतदाता सूची में चल रहे सुधार को लेकर भी चुनाव अधिकारियों के साथ चर्चा की है। उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली गई और काम की स्थिति पर बातचीत हुई। हाल के दिनों में मतदाता सूची के संशोधन और दावों-आपत्तियों को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं।

मंत्री की इस चर्चा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को लेकर कई राजनीतिक दल अलग-अलग सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार और चुनाव अधिकारियों के बीच समन्वय को जरूरी माना जा रहा है।

फिलहाल गन्ने के MSP को लेकर राज्य सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार 6,000 रुपये प्रति टन की मांग के साथ केंद्र के सामने प्रस्ताव रख चुकी है और अब केंद्र के अगले कदम का इंतजार है। यदि किसानों और चीनी मिलों के बीच सहमति बनती है और केंद्र बैठक बुलाता है, तो राज्य सरकार उसमें भाग लेकर किसानों का पक्ष रखेगी।

अब किसानों की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार राज्य के प्रस्ताव पर क्या फैसला लेती है। यदि कीमत में बढ़ोतरी होती है तो इसे गन्ना उत्पादकों के लिए बड़ी राहत माना जाएगा। फिलहाल राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसानों की मांग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के हाथ में है।

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