कर्नाटक

कर्नाटक में दूध की कीमत 12 से 15 रुपये बढ़ाने की मांग

Kavita2
25 Sept 2026 12:07 PM IST
कर्नाटक में दूध की कीमत 12 से 15 रुपये बढ़ाने की मांग
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बेंगलुरु। कर्नाटक में डेयरी किसानों की बढ़ती उत्पादन लागत और उनकी आर्थिक परेशानियों को लेकर कांग्रेस MLC एस. रवि ने सरकार से दूध की कीमत बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दूध उत्पादकों को उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के अनुपात में उचित कीमत नहीं मिल रही है। ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए दूध की कीमत में कम से कम 12 से 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी चाहिए।

सूखे और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के दौरान एस. रवि ने डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए चारा, पानी और अन्य जरूरी संसाधनों की लागत लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन की लागत पर पड़ रहा है। इसके बावजूद किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाली कीमत अपेक्षाकृत कम है, जिससे डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

MLC एस. रवि के मुताबिक, एक लीटर दूध के उत्पादन में करीब 42.20 रुपये की लागत आती है। इसके मुकाबले दूध उत्पादकों को सहकारी समितियों के जरिए लगभग 35 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहे हैं। इस हिसाब से किसानों को प्रत्येक लीटर दूध पर करीब 7.20 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस अंतर को दूर करने और किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने दूध की बाजार कीमतों का भी जिक्र किया। एस. रवि ने बताया कि सामान्य टोन्ड नंदिनी दूध की कीमत करीब 46 रुपये प्रति लीटर है, जबकि कर्नाटक में निजी कंपनियों के दूध की कीमत 56 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक, बाजार में अलग-अलग ब्रांड के दूध की कीमतों में अंतर को देखते हुए दूध उत्पादकों को मिलने वाली कीमत की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डेयरी किसानों के सामने केवल दूध की कीमत ही समस्या नहीं है। सूखे की स्थिति और चारे की कमी ने पशुपालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध नहीं होने पर किसानों को अतिरिक्त कीमत चुकाकर चारा खरीदना पड़ता है। इससे दूध उत्पादन की कुल लागत बढ़ जाती है और किसानों के मुनाफे पर असर पड़ता है।

एस. रवि ने पशुओं के बीमा और टीकाकरण से जुड़े खर्च का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन आवश्यक सेवाओं का खर्च भी किसानों को स्वयं उठाना पड़ रहा है। छोटे और सीमांत डेयरी किसानों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। पशुओं की बीमारी या अन्य समस्याओं की स्थिति में किसानों पर इलाज और देखभाल का खर्च भी बढ़ जाता है।

उन्होंने पानी के प्राकृतिक स्रोतों में कमी को भी डेयरी किसानों की समस्या से जोड़ा। सूखे के कारण कई इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। पशुओं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना डेयरी व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी की कमी होने पर किसानों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी लागत और बढ़ सकती है।

MLC ने सरकार से डेयरी किसानों की समस्याओं को व्यापक स्तर पर देखने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों को केवल दूध की खरीद कीमत में राहत देने के बजाय चारे, पानी, पशु बीमा और टीकाकरण जैसे खर्चों पर भी सहायता मिलनी चाहिए। इससे डेयरी किसानों को बढ़ती लागत के बीच अपना व्यवसाय जारी रखने में मदद मिल सकती है।

दूध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़ा हुआ है। बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन को अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में अपनाते हैं। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने और दूध की खरीद कीमत कम रहने से उनकी आय पर सीधा प्रभाव पड़ता है। एस. रवि ने सरकार से ऐसी नीति तैयार करने की मांग की जिससे किसानों को दूध का उचित मूल्य मिल सके और डेयरी क्षेत्र आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे।

एस. रवि की मांग ऐसे समय सामने आई है जब सूखे और चारे की कमी से किसानों की लागत बढ़ने की बात कही जा रही है। उन्होंने सरकार से दूध की कीमत में 12 से 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर विचार करने के साथ डेयरी किसानों को राहत देने के लिए अन्य आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि दूध की खरीद कीमत और उत्पादन लागत के बीच मौजूद अंतर को कम किया जाए, ताकि किसानों को लगातार हो रहे नुकसान से राहत मिल सके।

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