कर्नाटक

KRS जलाशय से सिंचाई पानी की मांग तेज, मांड्या में किसानों का प्रदर्शन

Kavita2
14 July 2026 10:51 AM IST
KRS जलाशय से सिंचाई पानी की मांग तेज, मांड्या में किसानों का प्रदर्शन
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मांड्या : कर्नाटक के मांड्या जिले में किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने को लेकर किसानों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पानी छोड़ने में देरी के कारण गन्ने समेत कई खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं और किसानों को भारी नुकसान का खतरा है।

किसानों के विभिन्न संगठनों ने मांड्या के संजय सर्कल पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुराने मैसूर-बेंगलुरु हाईवे को जाम कर दिया और जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने का प्रयास किया। किसानों ने सरकार से मांग की कि खेती के लिए KRS जलाशय से तुरंत पानी छोड़ा जाए, ताकि फसलों को बचाया जा सके।

प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अपनी शर्ट उतारकर विरोध जताया। किसानों का कहना था कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जबकि जलाशय में पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि KRS में करीब 90 फीट तक पानी होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार की देरी के कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं। खासकर गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती पर पहले ही काफी खर्च कर दिया है और यदि समय पर पानी नहीं मिला तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मानसून की अनिश्चित स्थिति के बीच सिंचाई पानी किसानों के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की स्थिति को देखते हुए जल्द निर्णय लिया जाए और नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाए।

किसानों ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के बजाय पीने के पानी से जुड़े प्रोजेक्ट के छठे चरण को प्राथमिकता दे रही है। किसानों का कहना है कि खेती और किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

किसान सुरक्षा समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार खेती के लिए पानी उपलब्ध नहीं करा सकती तो उसे पेयजल परियोजना को लेकर भी दोबारा विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि किसानों की आजीविका खतरे में है और सरकार को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करेंगे और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

वहीं, प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने किसानों के साथ बातचीत की संभावना जताई है। सरकार की ओर से अभी तक पानी छोड़ने को लेकर अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।

गौरतलब है कि KRS जलाशय कर्नाटक के लिए बेहद महत्वपूर्ण जल स्रोतों में से एक है। यह जलाशय मांड्या सहित कई क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है। हर साल पानी के बंटवारे और उपयोग को लेकर किसानों और सरकार के बीच चर्चा होती रहती है।

जल विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की स्थिति कमजोर होने पर जल प्रबंधन और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सरकार को जलाशय में उपलब्ध पानी, आने वाले महीनों की जरूरत और किसानों की मांगों के बीच संतुलन बनाकर फैसला लेना होगा।

फिलहाल मांड्या में किसानों का आंदोलन जारी है और सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया तो फसलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा और इसका सीधा असर हजारों किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

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