कर्नाटक

मेकेदातु परियोजना को जल्द मंजूरी की मांग, डीके शिवकुमार ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप

Kavita2
29 Sept 2026 12:08 PM IST
मेकेदातु परियोजना को जल्द मंजूरी की मांग, डीके शिवकुमार ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप
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कर्नाटक। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार से 16,745 करोड़ रुपये की मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर और पेयजल परियोजना को जल्द मंजूरी देने की मांग की है। सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात के दौरान उन्होंने मेकेदातु समेत कर्नाटक की कई लंबित जल और सिंचाई परियोजनाओं के लिए आवश्यक मंजूरी और केंद्रीय सहायता में तेजी लाने का आग्रह किया।

शिवकुमार ने पाटिल को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें मेकेदातु परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR का केंद्रीय जल आयोग से जल्द मूल्यांकन और मंजूरी कराने की मांग की गई। कर्नाटक ने संशोधित DPR और अनुपालन रिपोर्ट 13 अगस्त 2026 को केंद्रीय जल आयोग के पास जमा की थी। राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना पर निर्णय में तेजी आने से पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

मेकेदातु परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित है और इसकी अनुमानित लागत अब 16,745 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वर्ष 2019 में इसकी लागत लगभग 9,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो बाद में बढ़ गई। कर्नाटक इसे मुख्य रूप से बैलेंसिंग रिजर्वोयर और पेयजल परियोजना के रूप में आगे बढ़ा रहा है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने तमिलनाडु सरकार को भी प्रस्तावित परियोजना स्थल का निरीक्षण करने के लिए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि यदि तमिलनाडु की टीम मेकेदातु स्थल का दौरा करना चाहती है तो कर्नाटक सरकार पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को लेकर तमिलनाडु की जो चिंताएं हैं, उन्हें मौके पर जाकर समझा जा सकता है। उनका कहना है कि इससे दोनों राज्यों के बीच परियोजना के स्वरूप और पानी के इस्तेमाल को लेकर संवाद बढ़ सकता है। हालांकि तमिलनाडु की ओर से मेकेदातु परियोजना को लेकर लंबे समय से आपत्तियां जताई जाती रही हैं।

शिवकुमार के मुताबिक केंद्रीय जल आयोग की टीम मेकेदातु क्षेत्र का निरीक्षण कर चुकी है। परियोजना के लिए डूब क्षेत्र में आने वाली वन भूमि के बदले वैकल्पिक जमीन की पहचान किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का प्रतिनिधिमंडल आता है तो राज्य सरकार उसे परियोजना स्थल और इससे जुड़े प्रस्ताव की जानकारी उपलब्ध कराएगी।

कर्नाटक सरकार का कहना है कि मेकेदातु परियोजना से पेयजल जरूरतों को पूरा करने और कावेरी नदी के पानी के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। दूसरी ओर तमिलनाडु की चिंता कावेरी जल बंटवारे और उसके हिस्से के पानी पर संभावित प्रभाव को लेकर रही है। ऐसे में परियोजना लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय बनी हुई है।

सी.आर. पाटिल से मुलाकात के दौरान शिवकुमार ने केवल मेकेदातु परियोजना ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य बड़ी सिंचाई और जल संसाधन परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया। इनमें अपर भद्रा परियोजना, कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-दो के फैसले का राजपत्र में प्रकाशन और अन्य लंबित सिंचाई प्रस्ताव शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने अपर भद्रा परियोजना के लिए केंद्र से 5,300 करोड़ रुपये की सहायता जारी करने की मांग भी दोहराई। यह राशि केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित की गई थी। कर्नाटक सरकार का कहना है कि परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए केंद्रीय सहायता जरूरी है।

शिवकुमार ने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-दो के फैसले को लेकर भी केंद्र से सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध किया। राज्य सरकार चाहती है कि फैसले के प्रकाशन की प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि कर्नाटक अपने आवंटित जल हिस्से से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ा सके।

बैठक के दौरान कर्नाटक की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी मंजूरी मांगी गई। राज्य ने गोदावरी-कावेरी लिंक और बेदती-वरदा लिंक परियोजनाओं के संबंध में भी अपनी जरूरतों और पानी के हिस्से को लेकर केंद्र के सामने पक्ष रखा।

कर्नाटक इस समय सूखे और जल संकट से भी जूझ रहा है। राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है और केंद्र से राहत राशि की मांग की है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार मेकेदातु और अन्य जल परियोजनाओं की मंजूरी को महत्वपूर्ण बता रही है।

कावेरी जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पहले से मतभेद रहे हैं। हाल के दिनों में भी दोनों राज्यों के बीच पानी छोड़ने और उपलब्ध जल की मात्रा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। तमिलनाडु ने अपने हिस्से के पानी में कमी की बात कही है, जबकि कर्नाटक ने कम बारिश और जलाशयों में कम पानी उपलब्ध होने का हवाला दिया है।

मेकेदातु परियोजना पर आगे की प्रगति अब केंद्रीय जल आयोग के मूल्यांकन और अन्य जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगी। कर्नाटक सरकार ने केंद्र से प्रक्रिया को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है, जबकि तमिलनाडु की चिंताओं का समाधान भी परियोजना के भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा।

शिवकुमार ने संकेत दिया है कि कर्नाटक इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है और तमिलनाडु के प्रतिनिधिमंडल को स्थल निरीक्षण के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा। फिलहाल राज्य सरकार की नजर केंद्र की ओर से मिलने वाली मंजूरी और दोनों राज्यों के बीच आगे होने वाले संवाद पर है।

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