
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक (Karnataka) के पब्लिक वर्क्स मंत्री सतीश जारकीहोली (Satish Jarkiholi) ने कहा है कि कांग्रेस हाईकमान पहले केरल में मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राज्य के मुद्दों पर ध्यान देगा। उन्होंने संकेत दिया कि इसके बाद कर्नाटक में कैबिनेट फेरबदल और नेतृत्व से जुड़े मामलों पर निर्णय लिया जा सकता है।
मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लीडरशिप को लेकर जो स्थिति बनी हुई है, उस पर पार्टी हाईकमान की चुप्पी के कारण कई तरह की अटकलें लग रही हैं। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में संभावित फेरबदल पर फैसला करने के लिए इस महीने के अंत तक का समय है, लेकिन प्राथमिकता फिलहाल केरल के मुख्यमंत्री का चयन है।
जारकीहोली ने कहा कि पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि पहले केरल (Kerala) का मामला सुलझाया जाना चाहिए, क्योंकि वहां भी नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वहां मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं और इसी वजह से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस हाईकमान (Indian National Congress) सभी मुद्दों को धीरे-धीरे सुलझाने की कोशिश कर रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही निर्णय सामने आएगा। उनके अनुसार, पहले केरल का मामला समाप्त होने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) दिल्ली जा सकते हैं और वहां आगे की चर्चा हो सकती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में कैबिनेट विस्तार को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। ऐसे में यह देखना होगा कि हाईकमान इस पर क्या निर्णय लेता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।
जारकीहोली ने कहा कि राज्य में जो “कन्फ्यूजन” की स्थिति बनी हुई है, उसे जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लगभग सभी नेता इस बात पर सहमत हैं कि नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों का समाधान जरूरी है ताकि किसी तरह का टकराव या अस्थिरता न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे हाईकमान के निर्णय का पालन करेंगे। ऐसे में अब अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है।
राजनीतिक हलकों में इस बयान को कर्नाटक कांग्रेस (Karnataka Pradesh Congress Committee) के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं और संभावित बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल सभी की निगाहें कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।





