कर्नाटक

गारंटी योजनाओं पर छिड़ी बहस

Kavita2
24 Sept 2026 11:13 AM IST
गारंटी योजनाओं पर छिड़ी बहस
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बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को राज्य सरकार की पांच गारंटी योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस देखने को मिली। सूखे की स्थिति पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक बी. सुरेश गौड़ा ने सुझाव दिया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को अपनी गारंटी योजनाओं का लाभ केवल गरीब परिवारों तक सीमित करना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भाजपा विधायक से पूछा कि क्या वह वास्तव में अपनी इस बात पर कायम हैं और सरकार गरीब तथा संपन्न परिवारों की पहचान किस आधार पर करे।

विधानसभा में सूखे पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक सिद्दू सवदी ने किसानों से जुड़ी गारंटी योजनाओं पर खर्च होने वाली राशि को सूखा राहत में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। इसी चर्चा में सुरेश गौड़ा ने कहा कि सूखे की परिस्थितियों में गारंटी योजनाओं को गरीबों तक सीमित किया जाना चाहिए। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सीधे उनसे स्पष्टीकरण मांगा।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि गारंटी योजनाओं को केवल गरीब लोगों तक सीमित करना है तो गरीब और संपन्न व्यक्ति की पहचान किस आधार पर की जाएगी। उन्होंने पूछा कि क्या बीपीएल राशन कार्ड को इसकी पात्रता का आधार बनाया जाना चाहिए। सुरेश गौड़ा ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि वह गारंटी योजनाओं को गरीबों तक सीमित करने के पक्ष में अपनी बात कह रहे हैं।

बहस के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने राज्य सरकार की बीपीएल कार्ड संबंधी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया। इस पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सुरेश गौड़ा को अपनी राय रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ देर तक राजनीतिक नोकझोंक चली।

कर्नाटक सरकार की पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं में गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, शक्ति और युवा निधि शामिल हैं। गृह लक्ष्मी योजना के तहत पात्र परिवारों की महिला मुखिया को प्रति माह 2,000 रुपये दिए जाते हैं, जबकि गृह ज्योति के तहत निर्धारित शर्तों के साथ घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

शक्ति योजना महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा से जुड़ी है। विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान परिवारों की महिलाएं भी शक्ति योजना का इस्तेमाल करती हैं, जबकि गृह लक्ष्मी और मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीण तथा किसान परिवारों तक पहुंचता है।

गारंटी योजनाओं पर यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब कर्नाटक सरकार राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रही है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र सरकार से अंतरिम वित्तीय सहायता की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। राज्य सरकार के अनुसार कर्नाटक के 177 तालुक सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं और कृषि, पेयजल, पशुधन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ा है।

इसी आर्थिक और सूखा राहत की पृष्ठभूमि में विधानसभा में गारंटी योजनाओं पर बहस हुई। विपक्ष के कुछ विधायकों ने इन योजनाओं पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाए और संसाधनों को सूखा राहत की दिशा में लगाने की बात कही। वहीं मुख्यमंत्री ने योजनाओं के लाभार्थियों और पात्रता को लेकर विपक्ष से स्पष्ट रुख बताने को कहा।

गारंटी योजनाओं को लेकर राज्य में आर्थिक बहस पहले से जारी है। हाल ही में वित्त विभाग ने सरकार को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए खर्च में सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा था कि वित्त मंत्री के रूप में उन्हें यह पता है कि किन योजनाओं को जारी रखना है और किन योजनाओं को बदलना या बंद करना है। उन्होंने पांच गारंटी योजनाओं को लोगों की आजीविका से जुड़ा बताया था।

सरकार की ओर से हाल के दिनों में यह भी कहा गया है कि पांच गारंटी योजनाओं को बंद करने की कोई योजना नहीं है। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर भी कहा था कि इन योजनाओं को जारी रखा जाएगा। उन्होंने इन्हें सामाजिक न्याय और लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की सरकार की नीति का हिस्सा बताया।

हालांकि बुधवार की विधानसभा चर्चा में मुख्य सवाल यह बन गया कि क्या इन योजनाओं के लाभार्थियों का दायरा आर्थिक स्थिति के आधार पर सीमित किया जाना चाहिए। भाजपा विधायक सुरेश गौड़ा के सुझाव के बाद मुख्यमंत्री ने इसी मुद्दे पर पात्रता का स्पष्ट आधार बताने को कहा। सवाल यह था कि गरीब परिवार की पहचान बीपीएल कार्ड से की जाए या सरकार इसके लिए कोई अन्य आर्थिक मानदंड अपनाए।

विधानसभा में हुई यह चर्चा फिलहाल किसी नई पात्रता व्यवस्था या गारंटी योजनाओं में बदलाव के औपचारिक फैसले में नहीं बदली है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह सूखे पर बहस के दौरान विधायकों के बीच हुई चर्चा और सुझाव का हिस्सा थी। इसलिए गारंटी योजनाओं को केवल बीपीएल या गरीब परिवारों तक सीमित करने का कोई नया सरकारी निर्णय घोषित नहीं हुआ है।

कर्नाटक की पांच गारंटी योजनाएं पिछले कुछ वर्षों से राज्य की राजनीति और वित्तीय नीति का प्रमुख मुद्दा रही हैं। सरकार इन्हें आम लोगों को आर्थिक सहायता देने वाली महत्वपूर्ण योजनाएं बताती रही है, जबकि विपक्ष इनके खर्च और राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठाता रहा है। बुधवार को विधानसभा में हुई बहस ने एक बार फिर योजनाओं की पात्रता, उनके खर्च और सूखा राहत के लिए उपलब्ध संसाधनों के मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।

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