कर्नाटक

दावणगेरे मामला: सफाईकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल

Kavita2
3 Aug 2026 11:56 AM IST
दावणगेरे मामला: सफाईकर्मियों की सुरक्षा पर सवाल
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कर्नाटक : दावणगेरे जिले में दो सफाई कर्मचारियों को कथित तौर पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के शौचालय में उतरकर सफाई करने के लिए मजबूर किए जाने के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट जी.एम. गंगाधरास्वामी ने नगर निगम आयुक्त को इस मामले में FIR दर्ज करने और विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला जिले के एक PWD टूरिस्ट स्पॉट से जुड़ा है, जहां 27 जुलाई, 2026 को दो सफाई कर्मचारियों को परिसर में स्थित एक लंबे समय से बंद पड़े शौचालय की सफाई के लिए भेजा गया था। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए और उन्हें जोखिम भरे तरीके से काम करने के लिए कहा गया।

कर्नाटक दलित संघर्ष समिति (DSS) के जिला समन्वयक राघवेंद्र डी. कडेमानी ने इस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों को बिना दस्ताने, मास्क, सुरक्षा पोशाक और अन्य जरूरी उपकरणों के शौचालय के गड्ढे की सफाई करने के लिए मजबूर किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) ने टूरिस्ट स्पॉट के कर्मचारियों को शौचालय का गड्ढा साफ करने का निर्देश दिया था। अब प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहा है कि आदेश किस स्तर से दिया गया और क्या संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की ओर से नियमों का उल्लंघन किया गया।

इस घटना ने एक बार फिर मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला साफ करने की प्रथा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बिना सुरक्षा व्यवस्था के सेप्टिक टैंक, शौचालय गड्ढे या नालियों की सफाई के लिए उतारा जाता है, तो यह कानून का उल्लंघन है।

देश में ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के रोजगार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम, 2013’ के तहत हाथ से मैला साफ करने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बिना उचित सुरक्षा उपायों के खतरनाक सफाई कार्यों में लगाना प्रतिबंधित है।

प्रशासन के निर्देश के बाद नगर निगम स्तर पर मामले की जांच शुरू की जा रही है। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। इसमें कर्मचारियों के बयान, मौके की स्थिति, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी।

सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में लापरवाही से कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सफाई कार्यों के दौरान आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल जरूरी है। खासतौर पर सेप्टिक टैंक और गहरे शौचालयों की सफाई जैसे कामों में कर्मचारियों को जोखिम से बचाने के लिए तय नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

दावणगेरे की इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठे हैं कि सरकारी या सार्वजनिक स्थानों पर सफाई व्यवस्था के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई।

जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद अब मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस और नगर निगम अधिकारियों की जांच जारी है। इस मामले ने एक बार फिर सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, कार्यस्थल सुरक्षा और मैनुअल स्कैवेंजिंग रोकने के लिए बनाए गए कानूनों के प्रभावी पालन की जरूरत को सामने ला दिया है।

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