
Karnataka कर्नाटक: एक बड़े साइबर ठगी मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें 74 वर्षीय एक रिटायर्ड टीचर को करीब चार महीने तक “डिजिटल कैद” में रखकर 24 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड केस ने देशभर में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। स्टेट साइबर कमांड यूनिट ने इस मामले में अलग-अलग राज्यों से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला एक सुनियोजित साइबर गैंग से जुड़ा है, जिसने पीड़िता को मानसिक दबाव और डर के जरिए अपने जाल में फंसाया। आरोप है कि पीड़िता को लगातार निगरानी में रखकर उनसे संपर्क सीमित कर दिया गया और उन्हें किसी से बात करने या जानकारी साझा करने से रोका गया। इस दौरान उनसे विभिन्न तरीकों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई गई।
यह ठगी लगभग चार महीने तक चलती रही, जिसे जांच एजेंसियों ने “डिजिटल कैद” का नाम दिया है। पीड़िता को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा सुरक्षित नहीं है और उसे “सुरक्षित खाते” में ट्रांसफर करना जरूरी है। इसी बहाने अलग-अलग खातों में कुल 24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई।
इस बड़े फ्रॉड का खुलासा तब हुआ जब एक प्राइवेट बैंक मैनेजर को संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर शक हुआ। उन्होंने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए इसकी सूचना संबंधित साइबर क्राइम यूनिट को दी। बैंक की इस त्वरित कार्रवाई के चलते जांच शुरू हुई और आगे और बड़ी रकम ट्रांसफर होने से रोक दी गई।
जांच के बाद स्टेट साइबर कमांड यूनिट ने देश के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है—तमिलनाडु के इरोड से एन. शिवगनम, महाराष्ट्र के मुंबई से अक्काच मलिक, गुजरात के अहमदाबाद से पलक भाई पटेल और अमित नरेंद्र पटेल, नई दिल्ली से ओम प्रकाश राजपूत और बिहार से गौरव कुमार।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों में बैठे लोग विभिन्न भूमिकाएं निभा रहे थे। कुछ लोग पीड़िता से संपर्क करते थे, कुछ बैंक खातों का संचालन करते थे, जबकि अन्य पैसे को आगे ट्रांसफर करने का काम करते थे।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के साइबर अपराधों में पीड़ित को मानसिक दबाव में रखकर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाई जाती है, जिससे उन्हें शुरुआत में ठगी का एहसास भी नहीं होता। इस मामले में भी पीड़िता लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रभावित रही और उन्हें लगातार डर और भ्रम की स्थिति में रखा गया।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। साइबर क्राइम यूनिट ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या “सुरक्षित खाता” जैसी बातों पर भरोसा न करें और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।





