कर्नाटक

CWRC का आदेश, तमिलनाडु को 15 दिन मिलेगा कावेरी जल

Kavita2
28 July 2026 2:26 PM IST
CWRC का आदेश, तमिलनाडु को 15 दिन मिलेगा कावेरी जल
x

बेंगलुरु : कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच गतिविधियां तेज हो गई हैं। कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने मंगलवार को कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह बुधवार से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़े। समिति का यह फैसला दोनों राज्यों की दलीलें सुनने के बाद लिया गया।

समिति के निर्देश के अनुसार, कर्नाटक को बुधवार, 29 जुलाई की सुबह 8 बजे से बिलिगुंड्लु सीमा बिंदु पर प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। यह आदेश अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेगा। बिलिगुंड्लु कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी पर स्थित वह प्रमुख बिंदु है, जहां दोनों राज्यों के बीच छोड़े गए पानी की मात्रा मापी जाती है।

बैठक के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु, दोनों राज्यों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी स्थिति समिति के सामने रखी। कर्नाटक ने राज्य में कम बारिश और जलाशयों में घटते जलस्तर का हवाला देते हुए पानी छोड़ने में कठिनाइयों की बात कही। दूसरी ओर, तमिलनाडु ने अपने किसानों की सिंचाई जरूरतों और पेयजल आवश्यकताओं का उल्लेख करते हुए निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध कराने की मांग दोहराई।

दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद CWRC ने निर्देश जारी किया कि कर्नाटक को तय अवधि तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ना होगा। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन निर्धारित समय से किया जाए, ताकि तमिलनाडु को आवश्यक जल आपूर्ति मिल सके।

कावेरी नदी दक्षिण भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और इसका पानी कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल बंटवारे को लेकर दशकों से विवाद चलता रहा है। इस मामले में कई बार सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान वर्षा की स्थिति और जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर समय-समय पर जल छोड़ने का निर्णय लिया जाता है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर मतभेद बढ़ जाते हैं।

इस वर्ष भी कर्नाटक के कई हिस्सों में अपेक्षा के अनुरूप मानसूनी वर्षा नहीं हुई है। इससे राज्य के प्रमुख जलाशयों में जल संग्रहण पर असर पड़ा है। किसानों और स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है कि यदि बारिश में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, तमिलनाडु का कहना है कि राज्य के डेल्टा क्षेत्रों में धान और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए कावेरी का पानी बेहद आवश्यक है। किसानों की फसल बचाने और कृषि गतिविधियों को जारी रखने के लिए निर्धारित मात्रा में जल छोड़ा जाना जरूरी है।

कावेरी जल विनियमन समिति का यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब दोनों राज्यों में जल उपलब्धता को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। समिति भविष्य में वर्षा, जलाशयों के जलस्तर और दोनों राज्यों की आवश्यकताओं को देखते हुए आगे भी स्थिति का आकलन कर सकती है।

राजनीतिक स्तर पर भी कावेरी जल बंटवारा हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है। कम बारिश वाले वर्षों में यह विषय दोनों राज्यों में व्यापक चर्चा और राजनीतिक बहस का कारण बनता है। हालांकि, जल प्रबंधन से जुड़ी संस्थाएं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लेने पर जोर देती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल विवादों का स्थायी समाधान केवल न्यायिक आदेशों से नहीं, बल्कि बेहतर जल प्रबंधन, वर्षा जल संरक्षण, जलाशयों के प्रभावी संचालन और राज्यों के बीच समन्वय से संभव है। जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और वैज्ञानिक योजना से भविष्य में ऐसे विवादों की तीव्रता कम की जा सकती है।

फिलहाल, CWRC के निर्देश के बाद कर्नाटक को बुधवार सुबह से तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ना होगा। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और जलाशयों में जल संग्रहण इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दोनों राज्यों की नजर अब अगले 15 दिनों की जल आपूर्ति और मौसम की स्थिति पर टिकी हुई है।

Next Story