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कर्नाटक PSP प्रोजेक्ट पर संकट, ग्रीनको जांच के घेरे में

Kavita2
19 Aug 2026 10:45 AM IST
कर्नाटक PSP प्रोजेक्ट पर संकट, ग्रीनको जांच के घेरे में
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बेलगावी। कर्नाटक के बेलगावी जिले के सवदत्ती में बन रहा राज्य का पहला बड़ा पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (Pumped Storage Project) विवादों में घिर गया है। यह परियोजना राज्य में ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और योजना के अनुसार इसे अब तक लगभग पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन परियोजना का काम कर रही कंपनी के खिलाफ आई शिकायत और पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर उठे सवालों के कारण इसकी प्रगति प्रभावित हुई है।

सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना से जुड़ी कंपनी ‘ग्रीनको KA01 IREP प्राइवेट लिमिटेड’ जांच के दायरे में आ गई है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने कंपनी द्वारा कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं करने के मामले को गंभीर माना है।

मंत्रालय के अनुसार, कंपनी का तथ्यों को सामने नहीं रखना केवल जानकारी की कमी नहीं बल्कि “तथ्यों को छिपाने” के बराबर माना जा सकता है। इस मामले ने परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी और नियामकीय प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवदत्ती PSP परियोजना पर बढ़ा विवाद

पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट आधुनिक ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। इनमें अतिरिक्त बिजली को पानी को ऊंचाई पर पहुंचाकर संग्रहित किया जाता है और जरूरत पड़ने पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

सवदत्ती परियोजना को कर्नाटक में ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। यह परियोजना किसी संरक्षित क्षेत्र के बाहर बनाई जा रही थी, इसलिए इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माना गया था।

योजना के अनुसार परियोजना का निर्माण तेजी से पूरा किया जाना था, लेकिन अब कंपनी के खिलाफ शिकायत और जांच प्रक्रिया के कारण इसकी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

RTI दस्तावेजों से सामने आई जानकारी

RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि ग्रीनको KA01 IREP प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पर्यावरणीय नियमों से जुड़े मुद्दों को लेकर शिकायत की गई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी ने परियोजना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय ने मामले की समीक्षा की।

मंत्रालय ने पाया कि यदि किसी परियोजना से संबंधित जरूरी जानकारी जानबूझकर नहीं दी जाती है तो इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर कंपनी की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया पर असर

किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय मंजूरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। परियोजना के प्रभाव, आसपास के क्षेत्र, जल संसाधनों और जैव विविधता पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जाता है।

सवदत्ती पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर भी पर्यावरणीय नियमों के पालन की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा नियमों के अनुसार की जाएगी।

यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना

कर्नाटक समेत कई राज्य अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों में उत्पादन लगातार बदलता रहता है, ऐसे में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं बिजली ग्रिड को संतुलित रखने में मदद करती हैं।

सवदत्ती परियोजना को इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इसके पूरा होने से राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद थी।

लेकिन परियोजना से जुड़े विवाद के कारण अब इसकी समयसीमा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

कंपनी की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रीनको KA01 IREP प्राइवेट लिमिटेड देश में ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों में शामिल है। कंपनी द्वारा पर्यावरणीय प्रक्रिया में पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं, यह जांच का मुख्य विषय बना हुआ है।

पर्यावरण मंत्रालय की टिप्पणी के बाद अब कंपनी की ओर से दिए गए दस्तावेजों और प्रस्तुत जानकारियों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल मामले में जांच प्रक्रिया जारी है। संबंधित विभाग परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और पर्यावरणीय मंजूरियों की समीक्षा कर रहे हैं।

यदि जांच में कंपनी की ओर से नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो परियोजना पर आगे की कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। वहीं, यदि कंपनी सभी नियमों का पालन करती हुई पाई जाती है तो परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।

कर्नाटक के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इस परियोजना पर अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।

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