कर्नाटक

सिद्दरमैया से जुड़े वीडियो पर कोर्ट की रोक, राजनीतिक साजिश का आरोप

nidhi
14 Oct 2026 7:15 AM IST
सिद्दरमैया से जुड़े वीडियो पर कोर्ट की रोक, राजनीतिक साजिश का आरोप
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स्टिंग वीडियो विवाद में सिद्दरमैया को अंतरिम राहत
बेंगलुरु: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर बेंगलुरु की अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। सिद्दरमैया ने वीडियो और उससे संबंधित सामग्री को मानहानिकारक बताते हुए अदालत का रुख किया था। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से चरित्र हनन का अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को अदालत ने उनकी याचिका पर एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। आदेश में संबंधित प्रतिवादियों को विवादित सामग्री का प्रसारण, प्रकाशन और वितरण करने से रोका गया है।
19वीं अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने मानहानि के मुकदमे में यह आदेश दिया। मामले में 42 मीडिया संगठनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है। सिद्दरमैया ने अदालत से विवादित वीडियो तथा उससे जुड़ी सामग्री के प्रकाशन और प्रसार पर स्थायी रोक की मांग की है। उन्होंने संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच बंद करने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया था। फिलहाल अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान की है।
अदालत का आदेश दो विवादित वीडियो से संबंधित है। इनमें पहला 27 सितंबर और दूसरा दो अक्टूबर 2026 का है। रोक केवल मूल वीडियो तक सीमित नहीं है। आदेश में उनसे जुड़े अंश, क्लिप, स्क्रीनशॉट, प्रतिलिपि, संपादित संस्करण और संबंधित सामग्री को भी शामिल किया गया है। प्रतिवादियों को इन्हें टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य माध्यम से प्रकाशित और साझा करने से रोका गया है। संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को विवादित सामग्री तक पहुंच बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आदेश का दायरा प्रतिवादी संस्थाओं के साथ उनके मालिकों, संपादकों, निदेशकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंटों और प्रतिनिधियों तक भी जाता है। अदालत ने उनके माध्यम से या उनके अधीन काम करने वाले व्यक्तियों को भी संबंधित सामग्री फैलाने से रोका है। इसमें दोबारा प्रसारण, पुनः प्रकाशन, अपलोड करने, साझा करने और सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध रखने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इस प्रकार अंतरिम रोक विवादित वीडियो के अलग-अलग माध्यमों से प्रसार को संबोधित करती है।
सिद्दरमैया ने अपने बयान में कथित स्टिंग ऑपरेशन से किसी भी संबंध से इनकार किया है। उनका कहना है कि वीडियो के जरिए उन्हें विवाद से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और इसका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने इसे दुष्प्रचार बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत देने और निष्पक्ष जांच की मांग करने की जानकारी भी दी है। वीडियो की उत्पत्ति और उसे प्रसारित करने वालों के संबंध में जांच की मांग उनके पक्ष का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि वह अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं, लेकिन कुछ माध्यमों द्वारा इस स्वतंत्रता के कथित दुरुपयोग के कारण उन्हें कानूनी कदम उठाना पड़ा। उनका आरोप है कि अपुष्ट सामग्री के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश हुई है। मुकदमे में भी उन्होंने संबंधित सामग्री को असत्य और अपनी प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदेह बताया है। ये बातें सिद्दरमैया की ओर से रखे गए आरोप और दावे हैं।
सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र ने भी वीडियो को फर्जी बताते हुए इसे उनके पिता की छवि खराब करने की कोशिश बताया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग का समर्थन किया। दूसरी ओर, अदालत का मौजूदा आदेश अंतरिम और एकतरफा है। संबंधित आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। प्रतिवादियों का पक्ष सुने जाने और आगे की सुनवाई के बाद मुकदमे के अन्य प्रश्नों पर विचार होगा। फिलहाल न्यायालय ने विवादित सामग्री के प्रसार पर रोक और संबंधित डिजिटल सामग्री तक पहुंच बंद करने की राहत दी है।
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