
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित हेब्बल शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट अब विवादों में घिर गया है। बेंगलुरु साउथ लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट पर वैज्ञानिक मूल्यांकन के बिना आगे नहीं बढ़ने का आग्रह किया है।
करीब 1,140 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट को बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) की ओर से ट्रैफिक समस्या के समाधान के तौर पर पेश किया गया है। हाल ही में इस टनल के शुरुआती काम को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसकी उपयोगिता, पर्यावरणीय प्रभाव और भविष्य की परिवहन योजनाओं के साथ तालमेल को लेकर सवाल उठाए हैं।
प्रस्तावित हेब्बल शॉर्ट टनल हेब्बल झील क्षेत्र से होकर गुजरने वाला है। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए करीब 3.45 एकड़ जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। तेजस्वी सूर्या ने चिंता जताई है कि टनल निर्माण से पर्यावरण और शहर की भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
सांसद ने अपने पत्र में कहा कि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि परियोजना के सभी पहलुओं का विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह की समस्या खड़ी न हो।
तेजस्वी सूर्या ने यह भी दावा किया कि हेब्बल शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट का प्रस्तावित मेट्रो रेड लाइन और सबअर्बन रेल प्रोजेक्ट के साथ टकराव हो सकता है। उनका कहना है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में परिवहन योजनाओं को अलग-अलग तरीके से नहीं बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहर में पहले से ही कई बड़े परिवहन प्रोजेक्ट चल रहे हैं, तो नए प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले उसके प्रभाव का सही आकलन क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि किसी भी परियोजना से पहले यातायात, पर्यावरण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ नागरिक संगठनों ने भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। संगठनों का आरोप है कि परियोजना शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के साथ पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि कई याचिकाएं और आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
नागरिक संगठनों का कहना है कि हेब्बल झील क्षेत्र शहर के महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यहां बड़े निर्माण कार्यों से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग की है।
वहीं, प्रोजेक्ट के समर्थकों का कहना है कि बेंगलुरु में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए नए रास्तों की जरूरत है। हेब्बल क्षेत्र शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। ऐसे में टनल बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
BDA का उद्देश्य इस परियोजना के माध्यम से सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाना और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का मानना है कि टनल बनने से यात्रा समय कम हो सकता है और प्रमुख जंक्शनों पर जाम की समस्या में राहत मिल सकती है।
हालांकि, इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार और प्राधिकरण इसे ट्रैफिक समाधान के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और नागरिक समूह वैज्ञानिक जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया पर है। यह देखना अहम होगा कि सरकार सांसद तेजस्वी सूर्या की मांग पर कोई नया मूल्यांकन कराती है या नहीं।
बेंगलुरु जैसे तेजी से विस्तार कर रहे महानगर में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। हेब्बल शॉर्ट टनल प्रोजेक्ट इसी संतुलन को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।





