
कर्नाटक। कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वतखोरी के एक मामले में सुलेपेट पुलिस स्टेशन में पदस्थ कॉन्स्टेबल अनिल कुमार को कथित तौर पर 3,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने अदालत से जमानत मिलने के बाद पुलिस स्टेशन में नियमित रूप से हाजिरी लगाने की शर्त में राहत दिलाने के बदले शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी कॉन्स्टेबल को कथित रिश्वत की रकम लेते पकड़ लिया।
जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई लोकायुक्त एसपी सिद्दारजू सी. की देखरेख में की गई। जांच अधिकारी रविकुमार के नेतृत्व में शनिवार को एक ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें कॉन्स्टेबल अनिल कुमार को पकड़ा गया। कार्रवाई गदिकेश्वर गांव निवासी चंद्रकांत रंगनूर की शिकायत के आधार पर की गई थी।
शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त पुलिस को बताया था कि एक मामले में उसे अदालत से जमानत मिली हुई है। जमानत के बाद उसे निर्धारित अवधि पर सुलेपेट पुलिस स्टेशन में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान कॉन्स्टेबल अनिल कुमार के संपर्क में आने की बात सामने आई।
आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने पुलिस स्टेशन में हाजिरी से संबंधित शर्त में राहत देने के बदले चंद्रकांत से 3,000 रुपये की मांग की। शिकायत में कहा गया कि हाजिरी की प्रक्रिया को आसान करने या उसमें कथित रूप से ढील देने के लिए यह रकम मांगी गई थी।
शिकायत में हाजिरी की अवधि को लेकर दो तरह की जानकारी सामने आई है। एक विवरण में हर रविवार पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने की शर्त का उल्लेख है, जबकि उपलब्ध जानकारी में यह भी कहा गया है कि अदालत ने शिकायतकर्ता को हर महीने सुलेपेट पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। इस अंतर की स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच में स्पष्ट हो सकेगी।
रिश्वत की मांग किए जाने के बाद चंद्रकांत रंगनूर ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने आरोपों की प्रारंभिक जानकारी जुटाई और इसके आधार पर कार्रवाई की योजना तैयार की। इसके बाद शनिवार को लोकायुक्त पुलिस की टीम ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया।
ऑपरेशन के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी कॉन्स्टेबल के बीच कथित रिश्वत के लेन-देन पर नजर रखी गई। आरोप है कि जैसे ही अनिल कुमार ने 3,000 रुपये की रकम स्वीकार की, लोकायुक्त की टीम ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
लोकायुक्त पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि पुलिस कॉन्स्टेबल जमानत की शर्त में किस तरह राहत दिलाने का दावा कर रहा था और उसके पास इस संबंध में वास्तविक अधिकार या प्रभाव था या नहीं।
अदालत द्वारा जमानत देते समय कई मामलों में आरोपी को जांच में सहयोग करने, निर्धारित तारीख या अवधि में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने और अदालत की अनुमति के बिना कुछ गतिविधियां नहीं करने जैसी शर्तें लगाई जा सकती हैं। इन शर्तों में किसी भी तरह का परिवर्तन सामान्यतः सक्षम अदालत की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होता है। ऐसे में कॉन्स्टेबल द्वारा कथित तौर पर जमानत की शर्त में राहत के नाम पर रकम मांगने के आरोप की गंभीरता से जांच की जा रही है।
लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में रिश्वत के कथित लेन-देन से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान बरामद रकम, शिकायतकर्ता का बयान और कार्रवाई के दौरान तैयार किए गए दस्तावेज मामले की आगे की जांच का हिस्सा हो सकते हैं।
कॉन्स्टेबल अनिल कुमार पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। गिरफ्तारी या ट्रैप कार्रवाई अपने आप में दोषसिद्धि नहीं होती। मामले में अंतिम रूप से आरोप सिद्ध होने या नहीं होने का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
लोकायुक्त पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर सकती है कि कथित रिश्वत की मांग कब की गई थी और रकम लेने के बदले शिकायतकर्ता को क्या आश्वासन दिया गया था। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके संबंध में भी आगे कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से समय रहते लोकायुक्त पुलिस को जानकारी देना कार्रवाई का आधार बना। शिकायत के बाद अधिकारियों ने सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय कथित रिश्वत की मांग की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने शिकायतकर्ता के सहयोग से कार्रवाई को अंजाम दिया।
लोकायुक्त एसपी सिद्दारजू सी. की निगरानी और जांच अधिकारी रविकुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोपी कॉन्स्टेबल के खिलाफ संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी है। जमानत आदेश में शिकायतकर्ता के लिए वास्तव में क्या शर्त निर्धारित की गई थी, कॉन्स्टेबल ने किस आधार पर उसमें राहत दिलाने की बात कही और 3,000 रुपये की कथित मांग किस परिस्थिति में की गई, इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के एक कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का आरोप चर्चा में आ गया है। मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल कॉन्स्टेबल अनिल कुमार को कथित तौर पर 3,000 रुपये लेते पकड़े जाने के बाद कानूनी कार्रवाई की जा रही है।





