
बेंगलुरु। वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से तैयार हुए राजनीतिक माहौल को स्थायी युवा नेटवर्क में बदलना चाहती है। इसके लिए प्रदेशभर में 10 हजार ‘भारत जोड़ो युवा संघ’ गठित किए जाने की योजना है। इस अभियान से अब तक करीब साढ़े सात लाख युवाओं के जुड़ने का दावा किया गया है।
राज्य सरकार के युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग के तहत इन युवा संघों का गठन किया जाएगा। सरकार आने वाले महीनों में सदस्यता का आंकड़ा करीब 10 लाख तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें 16 से 35 वर्ष तक की आयु के युवाओं को शामिल किया जाएगा। प्रत्येक स्वीकृत संघ में करीब 100 से 250 सदस्य हो सकते हैं।
सरकार की ओर से इन युवा संघों को खेल, नेतृत्व विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों, वैज्ञानिक सोच, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सेवा से जोड़ने की बात कही गई है। हालांकि राजनीतिक जानकार इस पहल को कांग्रेस की दीर्घकालीन चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। उनके अनुसार, संगठित युवा नेटवर्क के माध्यम से पार्टी गांव और बूथ स्तर तक अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकती है।
पहली बार वोट देने वालों पर नजर
कांग्रेस के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव तक बड़ी संख्या में नए मतदाता मतदान की उम्र पूरी कर लेंगे। पार्टी की कोशिश इन युवाओं से पहले ही संवाद स्थापित करने और उन्हें सामाजिक एवं सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़ने की है। युवा संघों के माध्यम से पार्टी समर्थक नेतृत्व की नई पीढ़ी भी तैयार की जा सकती है।
योजना के तहत पंजीकरण कराने वाले युवाओं को स्थानीय स्तर पर खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नेतृत्व प्रशिक्षण और समाजसेवा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। सरकार प्रत्येक स्वीकृत युवा संघ को सालाना 10 लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा कर चुकी है। सभी 10 हजार संघों के लिए सालाना खर्च का अनुमान लगभग एक हजार करोड़ रुपये है। पूरक बजट के अंतर्गत इस कार्यक्रम के लिए 781 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
प्रदेश सरकार ने इस योजना को आधिकारिक रूप से युवा सशक्तिकरण कार्यक्रम बताया है। वहीं, कांग्रेस इसे युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों से जुड़ने वाले प्रभावशाली मंच के रूप में देख रही है। इसी दोहरी भूमिका के कारण यह योजना राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गई है।
शिवकुमार ने याद दिलाया 2023 का प्रदर्शन
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को इस पहल के राजनीतिक महत्व पर भी बात की। उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मार्ग में आने वाले कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को जीत मिली थी।
राहुल गांधी की यात्रा प्रदेश में चामराजनगर से बेल्लारी तक गई थी। शिवकुमार ने कहा कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा के उद्देश्य से भारत जोड़ो यात्रा निकाली गई थी। उनके अनुसार, यात्रा जिन क्षेत्रों से गुजरी वहां कांग्रेस को चुनावी सफलता मिली और यही राजनीतिक लहर 2028 में भी जारी रह सकती है।
शिवकुमार ने विश्वास जताया कि कांग्रेस अगले विधानसभा चुनाव में दोबारा सरकार बनाएगी। उन्होंने संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को युवाओं तक पहुंचने तथा सरकार की योजनाओं और पार्टी की विचारधारा के बारे में संवाद करने का संदेश भी दिया।
इससे पहले शिवकुमार ने बताया था कि युवा संघों के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पंजीकरण अभियान को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने करीब 7.8 लाख युवाओं के पंजीकरण की जानकारी दी थी। ताजा रिपोर्ट में प्रदेशभर में लगभग 7.5 लाख युवाओं के इस नेटवर्क से जुड़ने की बात कही गई है।
जमीनी संगठन तैयार करने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 हजार संघों के गठन से कांग्रेस को पंचायत और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर बड़ा सांगठनिक ढांचा मिल सकता है। युवा सदस्यों के बीच से भविष्य के स्थानीय नेता, पंचायत प्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता तैयार किए जा सकते हैं। सामाजिक गतिविधियों में नियमित भागीदारी से यह नेटवर्क चुनाव के समय मतदाताओं तक पहुंचने का माध्यम भी बन सकता है।
कांग्रेस सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों को भी संगठनात्मक संपर्क के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। शिवकुमार के मुताबिक, 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को लगभग 1.36 करोड़ वोट मिले थे, जबकि सरकार की पांच गारंटी योजनाओं का लाभ महिलाओं और विद्यार्थियों सहित लगभग 4.5 करोड़ लोगों तक पहुंचा है।
सरकार गारंटी समितियों में भी जमीनी भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रही है। प्रत्येक पंचायत से छह लोगों को इन समितियों में काम करने का अवसर देने का प्रस्ताव है। इससे करीब 70 हजार लोगों को सरकारी गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में भूमिका मिल सकती है।
योजना के राजनीतिक इस्तेमाल पर उठ सकते हैं सवाल
सरकारी विभाग के माध्यम से ‘भारत जोड़ो’ नाम वाले संघों के गठन पर राजनीतिक विवाद भी बढ़ सकता है, क्योंकि यह नाम कांग्रेस और राहुल गांधी की यात्रा से सीधे जुड़ा हुआ है। विपक्ष योजना के लिए सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और इसके संभावित राजनीतिक लाभ पर सवाल उठा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विपक्षी नेताओं ने अपने समर्थक युवाओं को भी इन संघों की सदस्यता लेने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि युवा संघों के गठन को केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति को प्रभावित करने वाले नेटवर्क के रूप में भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस का लक्ष्य साफ है—2028 के चुनाव से पहले युवाओं, नए मतदाताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से स्थायी संपर्क स्थापित करना। अब इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि युवा संघ वास्तव में खेल, नेतृत्व और सामुदायिक सेवा का मंच बनते हैं या आगामी चुनाव तक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बन जाते हैं।





