कर्नाटक
SIR के खिलाफ सड़क पर उतरेगी कांग्रेस, हर जिले और ब्लॉक में होगा आंदोलन
Ratna Netam
3 Nov 2026 5:52 PM IST

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बेंगलुरु : 3 नवंबर 2026। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना विरोध तेज करने का फैसला किया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मंगलवार को घोषणा की कि पार्टी राज्यभर में जिला, तालुक और ब्लॉक स्तर तक विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को लेकर कांग्रेस अपना आंदोलन जारी रखेगी। इस अभियान की शुरुआत 5 नवंबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित बड़े विरोध प्रदर्शन से की जाएगी।बीके हरिप्रसाद ने बेंगलुरु स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह आंदोलन केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने देशभर में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।हरिप्रसाद के अनुसार, 5 नवंबर को बेंगलुरु में प्रस्तावित प्रदर्शन में कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में राज्यस्तरीय प्रदर्शन के बाद आंदोलन को जिलों, तालुकों और ब्लॉक स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। कांग्रेस का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को आम जनता तक पहुंचाना है।कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं की आशंका है। पार्टी का कहना है कि इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता विवरणों को अद्यतन करना, त्रुटियों को सुधारना और निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करना होता है। किसी विशिष्ट अनियमितता का निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
दिल्ली के प्रदर्शन के बाद कर्नाटक में आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस का नया विरोध कार्यक्रम 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली के बाद सामने आया है। इस रैली में विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे।बीके हरिप्रसाद ने कहा कि बेंगलुरु का प्रदर्शन उसी आंदोलन की अगली कड़ी होगा। उन्होंने बताया कि इंडिया गठबंधन के नेताओं ने विरोध को देशभर में आगे बढ़ाने का फैसला किया है।कांग्रेस की रणनीति के अनुसार, पहले राज्यस्तर पर बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद जिला और स्थानीय स्तर के संगठनों को आंदोलन में सक्रिय किया जाएगा।हरिप्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी।
ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेगी कांग्रेस
कर्नाटक कांग्रेस की योजना इस आंदोलन में स्थानीय इकाइयों की भागीदारी बढ़ाने की है। पार्टी चाहती है कि केवल बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में भी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो।ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने से पार्टी स्थानीय कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं से सीधे संपर्क स्थापित कर सकेगी। जिला और तालुक स्तर के कार्यक्रमों के माध्यम से कांग्रेस अपने संगठन को भी सक्रिय करने की कोशिश करेगी।इससे पहले अक्टूबर में भी कर्नाटक कांग्रेस ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत ब्लॉक स्तर पर पदयात्राएं आयोजित करने की योजना बनाई थी। उस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया था।कांग्रेस ने 10 से 20 अक्टूबर के बीच राज्यभर में ब्लॉक स्तरीय पदयात्राओं का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके साथ पार्टी ने जनसभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई थी।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का विरोध तेज
एसआईआर को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे।कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। पार्टी ने चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।दूसरी ओर भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताती रही है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है।इस प्रकार एसआईआर का मुद्दा केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक टकराव का प्रमुख विषय बन गया है।मतदाता सूची किसी भी चुनाव की बुनियादी व्यवस्था होती है। इसमें दर्ज नामों के आधार पर नागरिक मतदान कर सकते हैं। इसलिए सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में सटीकता तथा पारदर्शिता महत्वपूर्ण होती है।यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट जाता है, तो उसके मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करने की प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
5 नवंबर के प्रदर्शन पर राजनीतिक दलों की नजर
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में 5 नवंबर को होने वाला प्रदर्शन कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए इंडिया गठबंधन की एकजुटता दिखाने और एसआईआर के मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश करेगी।राजनीतिक दृष्टि से यह आंदोलन कर्नाटक कांग्रेस के संगठनात्मक विस्तार की रणनीति से भी जुड़ा है। बड़े नेताओं की भागीदारी के साथ जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करना पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने का एक माध्यम हो सकता है।बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी। उनके अनुसार, पार्टी मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को लगातार उठाएगी।अब सभी की नजरें 5 नवंबर के प्रदर्शन और उसके बाद घोषित होने वाले जिला तथा ब्लॉक स्तरीय कार्यक्रमों पर हैं।कर्नाटक में कांग्रेस की इस घोषणा के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस अपने आंदोलन को किस स्तर तक विस्तार देती है और चुनाव आयोग तथा विपक्षी दलों के बीच जारी विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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