
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को योजना मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला। कथित घोटाले के आरोपों को लेकर विपक्षी बीजेपी लगातार मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में उनका खुलकर बचाव किया।
कांग्रेस सरकार ने कहा कि बी. नागेंद्र को अब तक किसी भी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है। सरकार का तर्क है कि केवल आरोप लगने के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को पद से हटाना उचित नहीं है।
विपक्षी बीजेपी के विरोध के बीच उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा में सरकार की ओर से बयान पेश किया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बीजेपी ने विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जब तक मंत्री पद पर बने रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठते रहेंगे।
बीजेपी नेताओं ने सदन में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और सरकार पर आरोप लगाया कि वह आरोपी मंत्री को बचाने का प्रयास कर रही है। विपक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं, कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है। सरकार ने कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि बी. नागेंद्र पहले अनुसूचित जनजाति (एसटी) कल्याण मंत्री थे। वर्ष 2024 में कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले को लेकर उनका नाम विवादों में आया था। उस समय भी बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग की थी।
विपक्ष का आरोप है कि वाल्मीकि विकास निगम से जुड़े मामले में वित्तीय अनियमितताएं हुईं और इसकी जिम्मेदारी सरकार को तय करनी चाहिए। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मंत्री पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी भी मामले में अंतिम फैसला अदालत करती है। उन्होंने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को अदालत दोषी नहीं ठहराती, तब तक उसे आरोपी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विधानसभा में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों में नरमी बरतने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के बयान के बाद भी बीजेपी अपने रुख पर कायम रही। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे।
कर्नाटक की राजनीति में बी. नागेंद्र का मामला एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गया है। इससे पहले भी यह मामला विधानसभा में चर्चा का विषय रहा है और अब मानसून सत्र के दौरान विपक्ष इसे सरकार को घेरने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामलों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आम बात है। जहां सरकार कानूनी प्रक्रिया का हवाला देती है, वहीं विपक्ष नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर इस्तीफे की मांग करता है।
फिलहाल बी. नागेंद्र को लेकर विवाद जारी है। कांग्रेस सरकार अपने मंत्री के समर्थन में खड़ी है, जबकि बीजेपी उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर और हंगामा होने की संभावना है।





