
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) 2026 को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर प्रक्रिया में कथित विसंगतियों और आंकड़ों के मेल में कमी पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने आग्रह किया है कि SIR प्रक्रिया को अगले चरण में आगे बढ़ाने से पहले उठाए गए सभी सवालों का बिंदुवार जवाब दिया जाए।
हरिप्रसाद ने अपने पत्र में SIR 2026 की प्रक्रिया में गैप, डेटा मिसमैच, एकतरफा रवैये और मनमाने पहलुओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्तर पर सामने आ रही विसंगतियों को स्पष्ट किए बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों की पारदर्शिता और उनके मिलान की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
2025 की अंतिम सूची के आंकड़े पर सवाल
हरिप्रसाद ने अपने पत्र में 2025 की अंतिम मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय उपलब्ध आंकड़ों का हवाला दिया। उनके मुताबिक, 2025 की अंतिम मतदाता सूची में 5,54,22,344 मतदाता थे और 30 जून को SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय भी यही संख्या दर्ज दिखाई गई।
KPCC अध्यक्ष ने निर्वाचन अधिकारी से पूछा कि यदि SIR शुरू होने से पहले मतदाता सूची में कोई नाम जोड़ा गया, हटाया गया या उसमें सुधार किया गया था तो उसका विवरण क्या है। उनका कहना है कि प्रक्रिया शुरू होने से पहले आंकड़ों में बदलाव की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि बाद में सामने आने वाले आंकड़ों का सही तरीके से मिलान किया जा सके।
ASDDO आंकड़ों और हटाए गए नामों में अंतर
हरिप्रसाद ने ASDDO आंकड़ों और 2025 की अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया है। ASDDO श्रेणी में अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य श्रेणियों से जुड़े मतदाताओं को चिह्नित किया जाता है।
कांग्रेस का कहना है कि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में ASDDO आंकड़ों और वास्तविक तौर पर हटाए गए नामों के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ क्षेत्रों में यह आंकड़ा अधिक है, जबकि कुछ में कम। हरिप्रसाद ने ऐसे अंतर को विधानसभा क्षेत्रवार मिलान करने की मांग की है।
उन्होंने ऐसे मामलों को ‘Unexplained Voters’ यानी अस्पष्ट मतदाता की श्रेणी से जोड़ते हुए विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों का मिलान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रत्येक अंतर का कारण रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
एक बूथ पर 1,016 में 389 नाम का मामला
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने बेंगलुरु की यशवंतपुर विधानसभा सीट के एक बूथ का उदाहरण भी सामने रखा है। कांग्रेस के अनुसार, पार्ट नंबर 512 में कुल 1,016 मतदाताओं में से केवल 389 मतदाता वैध सूची में बचे बताए गए हैं। शेष मतदाताओं में 339 को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 19 को मृत और 265 को ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में बताया गया।
कांग्रेस ने इस आंकड़े के आधिकारिक स्पष्टीकरण और पुनर्मिलान की मांग की है। हालांकि, इन वर्गीकरणों को लेकर अंतिम स्थिति निर्वाचन अधिकारियों की जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए इन्हें फिलहाल कांग्रेस द्वारा उठाई गई आपत्ति के तौर पर देखना जरूरी है।
फॉर्म नहीं मिलने और अपलोड नहीं होने की शिकायतें
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की ओर से भी अलग-अलग तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में एन्यूमरेशन फॉर्म एकत्र नहीं किए गए या उन्हें सिस्टम पर अपलोड नहीं किया गया। कुछ पात्र मतदाताओं को कथित तौर पर स्थानांतरित श्रेणी में डालने और मृत मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड की पर्याप्त पुष्टि नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है।
इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के स्तर पर शिकायतों के निपटारे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने प्रक्रिया में सुधार के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने और मतदाताओं को पर्याप्त समय देने की मांग की है।
पारदर्शिता और डेटा उपलब्ध कराने की मांग
KPCC ने राज्यभर में SIR प्रक्रिया की समीक्षा, पार्टवार सांख्यिकीय रिपोर्ट, अनमैप्ड मतदाताओं का विशेष सत्यापन और स्थानांतरित तथा मृत मतदाताओं के वर्गीकरण की पुष्टि की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े स्पष्ट और आसानी से सत्यापित किए जा सकने वाले होने चाहिए।
हरिप्रसाद ने CEO से प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के संबंध में स्पष्टीकरण और उठाई गई आपत्तियों के समाधान का आश्वासन मांगा है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
SIR प्रक्रिया का अगला चरण
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया फिलहाल नोटिस, सुनवाई, दावे और आपत्तियों के चरण से गुजर रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर तक 17,63,187 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी थी, जबकि 17,33,362 मामले लंबित थे। कुल 43,81,945 मतदाताओं को तार्किक विसंगति/अनमैपिंग जैसी श्रेणियों में सुनवाई के लिए रखा गया था। इनमें से 34,96,549 नोटिस जारी और वितरित किए जा चुके थे, जबकि 8,85,396 नोटिस वितरित होना बाकी थे।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। मतदाताओं की सुविधा के लिए 19 और 20 सितंबर को राज्यभर के मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान भी आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबु कुमार ने सामने आई शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करने और मामलों को देखने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि सत्यापन के लिए निर्धारित 12 दस्तावेजों में से किसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब जवाब का इंतजार
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों के बीच अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से इन सवालों पर स्पष्टीकरण का इंतजार है। फिलहाल हरिप्रसाद द्वारा उठाई गई बातें राजनीतिक दल की शिकायत और आरोप हैं, जिन्हें अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पहले दावे, आपत्तियों और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होनी है। ऐसे में यह प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस द्वारा उठाए गए आंकड़ों के अंतर और अन्य शिकायतों में से कितने मामलों में रिकॉर्ड सुधार की जरूरत सामने आती है।





