
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के हाल ही में अध्यक्ष बने बी.के. हरिप्रसाद ने बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे उनके सम्मान में माला, गुलदस्ते और शॉल पर पैसे खर्च न करें। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों में होने वाला खर्च पार्टी के काम आना चाहिए।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि कई लोग उनके स्वागत के लिए माला और शॉल लेकर आते हैं, लेकिन यह संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कार्यकर्ता वास्तव में उनका सम्मान करना चाहते हैं, तो वे इन वस्तुओं पर पैसा खर्च करने के बजाय वह राशि सीधे कांग्रेस पार्टी को दान करें।
उन्होंने अपने बयान में पार्टी के वित्तीय हालात का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस के खजाने में लगभग 700 करोड़ रुपये हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास करीब 10,000 करोड़ रुपये की निधि है। इस तुलना के जरिए उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं से अधिक सहयोग की अपील की।
हरिप्रसाद ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए आर्थिक सहयोग भी जरूरी है और हर कार्यकर्ता की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए संसाधनों का सही उपयोग करना होगा, न कि प्रतीकात्मक स्वागत और औपचारिकताओं में खर्च बढ़ाना होगा।
इस मौके पर उन्होंने KPCC के कार्यकारी अध्यक्ष जी.सी. चंद्रशेखर और मंजूनाथ भंडारी द्वारा किए गए चुनावी सर्वे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिन कार्यकर्ताओं के जीतने की वास्तविक संभावना होगी, उन्हें ही आगामी चुनावों में टिकट दिया जाएगा, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।
हरिप्रसाद ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में टिकट वितरण के दौरान धनबल नहीं, बल्कि योग्यता और जमीनी स्तर पर कार्य करने की प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि आने वाले ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) चुनावों में उम्मीदवारों के चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता का पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों को आगे लाना है जो जनता के बीच काम करने की क्षमता रखते हों। इसके लिए संगठन को मजबूत और अनुशासित बनाना जरूरी है।
हरिप्रसाद के इस बयान को पार्टी के भीतर संगठनात्मक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय और संगठित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल, इस बयान पर पार्टी के भीतर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे संगठन को आर्थिक और संरचनात्मक रूप से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।





