कर्नाटक

पोस्टल वोट दोबारा गिनती में कांग्रेस MLA की हार, BJP के डी.एन. जीवराज बने विजेता

Kavita2
4 May 2026 11:48 AM IST
पोस्टल वोट दोबारा गिनती में कांग्रेस MLA की हार, BJP के डी.एन. जीवराज बने विजेता
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी नतीजों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। हाई कोर्ट के आदेश पर की गई पोस्टल वोटों की दोबारा गिनती के बाद कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा की जीत पलट गई है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार डी.एन. जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच में कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के कुल 255 वोट अमान्य पाए गए। इस बदलाव के कारण पहले हार चुके BJP उम्मीदवार डी.एन. जीवराज अब 52 वोटों की बढ़त पर पहुंच गए हैं। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने उन्हें आधिकारिक रूप से विधायक (MLA) का प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

यह पूरा मामला 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस के टी.डी. राजेगौड़ा ने BJP उम्मीदवार डी.एन. जीवराज को मात्र 201 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया था। इस जीत के बाद राजेगौड़ा मई 2023 से विधायक के रूप में कार्यरत थे।

हालांकि, इस परिणाम को चुनौती देते हुए डी.एन. जीवराज ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने 6 अप्रैल को पोस्टल बैलेट की पुनः जांच और दोबारा गिनती का आदेश दिया था। इसके बाद यह प्रक्रिया शनिवार को शुरू हुई और देर रात तक जारी रही।

दोबारा गिनती में कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए। प्रारंभिक रिकॉर्ड के अनुसार, डी.एन. जीवराज को 692 वोट मिले थे, लेकिन पुनः जांच के बाद 690 वोट वैध माने गए। वहीं, कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के वोट 569 से घटकर 314 रह गए, यानी 255 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए।

इसी बड़े अंतर के चलते चुनावी परिणाम पूरी तरह बदल गया और BJP उम्मीदवार को बढ़त मिल गई। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 और चुनाव नियमों के तहत डी.एन. जीवराज को औपचारिक रूप से विजेता घोषित कर दिया।

इस फैसले के साथ ही टी.डी. राजेगौड़ा की विधायक पद पर स्थिति समाप्त हो गई है और अब डी.एन. जीवराज श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के नए विधायक बन गए हैं।

यह मामला राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि एक बार जीत चुके उम्मीदवार की सीट पोस्टल वोटों की पुनः जांच के बाद बदल गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला चुनाव प्रक्रिया में पोस्टल बैलेट की अहमियत और कानूनी जांच की भूमिका को भी दर्शाता है।

फिलहाल इस निर्णय के बाद दोनों दलों में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जबकि प्रशासन ने पूरे मामले को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निष्पादित होने की बात कही है।

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