
बेंगलुरु: AICC के महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांज़ैक्शन पर ट्रांज़ैक्शन चार्ज लगाने के प्रस्ताव को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की।
सुरजेवाला ने चेतावनी दी कि किसी भी अतिरिक्त शुल्क का बोझ आखिरकार ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा, वहीं वेणुगोपाल ने इस कदम की तुलना "लोगों की जेब काटने" से की।
सुरजेवाला ने UPI ट्रांज़ैक्शन के बढ़ते दायरे को उजागर करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2025-26 के दौरान UPI पर 24,162 करोड़ ट्रांज़ैक्शन हुए, जिनकी कीमत 314 लाख करोड़ रुपये थी और 2026-27 में ट्रांज़ैक्शन की वैल्यू 400 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाता है, तो 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांज़ैक्शन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी लागतें आखिरकार ज़्यादा कीमतों के ज़रिए ग्राहकों पर डाली जाएंगी।
सुरजेवाला ने ट्रांज़ैक्शन चार्ज से जुड़े प्रावधानों, खासकर सेक्शन 10A में बदलाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों से सरकार को संसद में पेश किए बिना नोटिफिकेशन के ज़रिए शुल्क में बदलाव करने या उन्हें बढ़ाने की अनुमति मिल सकती है।





