
बेंगलुरु। कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली के समर्थन में राज्य के कई मंत्रियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय जांच एजेंसियों—केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED)—के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इन संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का यह हमला सतीश जारकीहोली और उनके परिवार से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद सामने आया है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरोप लगाया कि जारकीहोली और उनके परिवार के खिलाफ ED की कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्रीय जांच एजेंसियां वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं या फिर उन्हें राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रियांक खड़गे ने आंकड़ों का दिया हवाला
प्रियांक खड़गे ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2015-16 से फरवरी 2025 तक ED ने राजनीतिक नेताओं और विपक्षी दलों से जुड़े लोगों के खिलाफ 193 मामले दर्ज किए। उनके मुताबिक, इन मामलों में से केवल दो मामलों में सजा हुई है।
गृह मंत्री ने इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन सजा के मामले बेहद कम हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन जांचों का वास्तविक उद्देश्य क्या है।
उन्होंने पूछा कि क्या केंद्रीय एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं या फिर राजनीतिक विरोधियों को दबाव में लाने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर केंद्र पर निशाना
प्रियांक खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने लिखा, “हमले, समन, गिरफ्तारियां, प्राइम टाइम न्यूज़, राजनीतिक कीचड़ उछालना... लगभग एक दशक के बाद, सिर्फ़ दो मामलों में सज़ा हुई है।”
अपने पोस्ट के जरिए उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और उसके बाद होने वाली राजनीतिक तथा मीडिया गतिविधियों पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता का आरोप है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई को विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक अभियान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
उनके मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव या पक्षपात के आरोप लगते हैं, तो इससे संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
जारकीहोली के समर्थन में कांग्रेस नेता
सतीश जारकीहोली के समर्थन में राज्य सरकार के कई मंत्रियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम कानून के मुताबिक करना चाहिए, लेकिन कार्रवाई के पीछे राजनीतिक उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार या आर्थिक अनियमितताओं के ठोस सबूत हैं तो जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन केवल राजनीतिक संबंधों या विपक्ष में होने के आधार पर किसी नेता को निशाना बनाया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
जारकीहोली के समर्थक नेताओं का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केंद्र सरकार को देना चाहिए। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है।
CBI, ED और आयकर विभाग पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने केवल ED ही नहीं, बल्कि CBI और आयकर विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि जांच एजेंसियां संवैधानिक और कानूनी संस्थाओं के रूप में काम करती हैं और उन्हें किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का कांग्रेस समर्थन करती है, लेकिन कार्रवाई सभी राजनीतिक दलों और नेताओं के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत
सतीश जारकीहोली से जुड़े मामले को लेकर कर्नाटक में कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश कर रही है, जबकि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का आधार जांच और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और उनके कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष लंबे समय से ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे सतीश जारकीहोली और उनके परिवार के साथ खड़े हैं तथा केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी स्तर पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
वहीं, इस विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक पक्षपात के आरोपों का निष्पक्ष समाधान किस तरह निकलेगा। कांग्रेस द्वारा पेश किए गए मामलों और सजा के आंकड़ों ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना है।





