
Karnataka कर्नाटक: गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने यह फैसला किया है कि वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) 2005 को जारी रखने और इस वर्ष के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। यह कदम केंद्र सरकार के हालिया रुख और योजना से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच उठाया गया है।
बैठक के बाद कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (VB-GRAMG) को लेकर अब तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह देरी राज्य सरकारों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर रही है।
पाटिल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने केवल एक सर्कुलर जारी कर राज्यों से कहा है कि वे बिना अतिरिक्त फंडिंग के ही MGNREGA के तहत चल रहे कार्यों को जारी रखें। उन्होंने इसे व्यवहारिक रूप से असंभव बताया और कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार योजनाओं पर असर पड़ रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र की ओर से किसी वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है। उनके अनुसार, राज्य सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए MGNREGA पर काफी हद तक निर्भर हैं।
पाटिल ने कहा, “हम पहले ही मई महीने में पहुंच चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने VB-GRAMG लागू करने को लेकर कोई स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इसी कारण राज्य सरकार ने अब न्यायिक हस्तक्षेप का निर्णय लिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध करेगी कि उसे MGNREGA के तहत कार्य जारी रखने और चालू वर्ष के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे रोका नहीं जा सकता।
सरकार का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने के लिए यह योजना जरूरी है और किसी भी तरह की अनिश्चितता से लाखों श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं।
इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली याचिका और उसके संभावित फैसले पर टिकी है।





