कर्नाटक

VTU समारोह में गाया गया पूरा वंदे मातरम

Kavita2
27 Sept 2026 11:37 AM IST
VTU समारोह में गाया गया पूरा वंदे मातरम
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बेलगाम। विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) के 26वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शनिवार को ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया। समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल और VTU के चांसलर थावरचंद गहलोत सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की ओर से 26वें दीक्षांत समारोह के पहले भाग के आयोजन की पुष्टि भी की गई है।

‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण ऐसे समय में गाया गया है, जब कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों में इस राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर सरकार और राज्यपाल के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। कर्नाटक सरकार ने 8 सितंबर के आदेश में राज्य सरकार के कार्यक्रमों में सामान्य तौर पर ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो पद गाने का निर्देश दिया था। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया था।

शनिवार को बेलगाम में आयोजित VTU के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मौजूदगी थी। इसी दौरान ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण प्रस्तुत किया गया। समारोह में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद थे।

VTU की ओर से जारी कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार 26वें वार्षिक दीक्षांत समारोह का पहला भाग 26 सितंबर को आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय ने इसके लिए लाइव स्ट्रीमिंग और विद्यार्थियों, स्वर्ण पदक विजेताओं तथा शोधार्थियों से संबंधित सूचनाएं भी जारी की थीं।

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने 8 सितंबर को सरकारी कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर नया निर्देश जारी किया था। इसके तहत सामान्य राज्य सरकारी कार्यक्रमों में गीत के पहले दो पद गाने की व्यवस्था की गई थी। आदेश में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए अपवाद रखा गया था। सरकार ने अपने आदेश में एकरूपता, गरिमा और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखने की बात कही थी।

इस आदेश के बाद राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। राज्यपाल ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि आधिकारिक रूप से निर्धारित ‘वंदे मातरम’ के संस्करण और उसके सामूहिक गायन से संबंधित निर्देशों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में 8 सितंबर के सरकारी आदेश को केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप फिर से देखने की बात कही गई थी। इस मुद्दे पर बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी कानूनी बहस हुई। सरकार ने अदालत के समक्ष अपने दो-पद वाले निर्देश का बचाव किया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया था।

इसी विवाद के बीच VTU के दीक्षांत समारोह में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया जाना घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बना देता है। हालांकि राज्य सरकार के 8 सितंबर के आदेश में राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को अपवाद के तौर पर रखा गया था। शनिवार के समारोह में राज्यपाल स्वयं मौजूद थे।

‘वंदे मातरम’ को लेकर कर्नाटक में हाल के दिनों में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस भी तेज हुई है। विधानसभा और विधान परिषद के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी भाजपा और जेडीएस विधायकों ने भी गीत के पूरे संस्करण का गायन किया था। उस दौरान सत्तापक्ष के सदस्य पहले दो पदों के बाद रुक गए थे, जबकि विपक्षी सदस्य पूरा गीत गाते रहे।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश भी चर्चा में रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पदों वाले आधिकारिक संस्करण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जहां राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं।

कर्नाटक सरकार ने हालांकि अपने 8 सितंबर के आदेश में राज्य के सरकारी कार्यक्रमों के लिए पहले दो पदों की व्यवस्था निर्धारित की। सरकार ने इसे कार्यक्रमों की प्रकृति और संदर्भ के अनुसार एकरूपता तथा उचित प्रोटोकॉल बनाए रखने से जुड़ा निर्णय बताया था।

राज्यपाल गहलोत ने सरकार से आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में भी पहुंचा। अब बेलगाम में VTU के 26वें दीक्षांत समारोह में पूरा ‘वंदे मातरम’ गाया गया है।

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को डिग्री और अन्य सम्मान प्रदान किए गए। VTU ने समारोह से पहले स्वर्ण पदक विजेताओं, रैंक धारकों और शोधार्थियों के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किए थे। विश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 26वें वार्षिक दीक्षांत समारोह का आयोजन 26 सितंबर से संबंधित था।

कार्यक्रम में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वही राज्य के 8 सितंबर के आदेश पर पुनर्विचार की मांग मुख्यमंत्री से कर चुके हैं। ऐसे में समारोह में पूरे ‘वंदे मातरम’ का गायन राज्य में चल रही बहस के बीच एक उल्लेखनीय घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।

हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि राज्य सरकार के आदेश में राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट अपवाद रखा गया था। इसलिए VTU समारोह में पूरे संस्करण के गायन को उस अपवाद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार समारोह में राज्यपाल के साथ उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे।

VTU का 26वां वार्षिक दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण आयोजन रहा। विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम के लिए पहले से तैयारियां पूरी की थीं और विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई थी। समारोह के दौरान डिग्री प्रदान करने के साथ राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण भी प्रस्तुत किया गया।

‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर राज्य में जारी विवाद के बीच यह घटनाक्रम आगे की राजनीतिक और कानूनी बहस के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। एक ओर राज्य सरकार ने सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो पदों का निर्देश दिया है, वहीं राज्यपाल ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आदेश पर पुनर्विचार का आग्रह किया है।

फिलहाल बेलगाम के VTU परिसर में हुए दीक्षांत समारोह ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। राज्यपाल की मौजूदगी में पूरे संस्करण का गायन हुआ और विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया गया।

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