कर्नाटक

महिला आश्रय गृहों की सुविधाएं सुधारने में जुटा आयोग

Kavita2
14 Aug 2026 11:26 AM IST
महिला आश्रय गृहों की सुविधाएं सुधारने में जुटा आयोग
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बेंगलुरु: कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने राज्यभर के महिला आश्रय गृहों में रहने वाली महिलाओं के लिए सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने कहा कि आश्रय गृहों में रहने वाली महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने बेंगलुरु स्थित राज्य महिला आश्रय केंद्र का तीसरी बार दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, रहने की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की।

आयोग अध्यक्ष ने बताया कि पिछली जांच के दौरान आश्रय केंद्र में कई कमियों की जानकारी सामने आई थी। इनमें पीने के पानी की समस्या, गर्म पानी की सुविधा का अभाव और मनोरंजन के लिए टेलीविजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल थी। इसके अलावा कुछ महिलाओं ने कर्मचारियों द्वारा परेशान किए जाने के आरोप भी लगाए थे।

इन शिकायतों के बाद आयोग ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए थे। डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने कहा कि हालिया निरीक्षण के दौरान पहले की तुलना में केंद्र में काफी सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ क्षेत्रों में लगातार निगरानी और सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आश्रय गृह में रहने वाली महिलाओं की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। खासकर स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की जाए।

फिलहाल बेंगलुरु के इस महिला आश्रय केंद्र में कुल 39 लोग रह रहे हैं। इनमें से 31 महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। आयोग ने इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सहायता, नियमित जांच और उचित पोषण उपलब्ध कराया जाए।

डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महिलाओं की देखभाल के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण की जरूरत होती है। केवल रहने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें चिकित्सा सुविधा, परामर्श और सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि आश्रय गृह केवल रहने की जगह नहीं बल्कि जरूरतमंद महिलाओं के लिए सुरक्षा और पुनर्वास का माध्यम होते हैं। इसलिए यहां की व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि महिलाओं को स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त भोजन, साफ पानी और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से मिलनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी निगरानी रखी जानी चाहिए ताकि किसी भी महिला को परेशानी का सामना न करना पड़े।

राज्य महिला आयोग समय-समय पर महिला आश्रय गृहों का निरीक्षण करता है ताकि वहां रहने वाली महिलाओं की समस्याओं को समझा जा सके और उनका समाधान किया जा सके। आयोग का उद्देश्य इन केंद्रों में रहने वाली महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आश्रय गृहों में रहने वाली कई महिलाएं पहले से ही सामाजिक, मानसिक या पारिवारिक चुनौतियों का सामना कर रही होती हैं। ऐसे में उन्हें बेहतर सुविधाओं के साथ भावनात्मक सहयोग की भी जरूरत होती है।

कर्नाटक महिला आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि राज्य के अन्य आश्रय गृहों का भी निरीक्षण किया जाएगा। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी केंद्रों में तय मानकों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध हों।

डॉ. नागलक्ष्मी चौधरी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आश्रय गृहों में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और समय पर समाधान किया जाए।

इस पहल से उम्मीद है कि राज्य के महिला आश्रय गृहों में व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी। आयोग की निगरानी से न केवल बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि वहां रहने वाली महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल भी मिल सकेगा।

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