
Karnataka कर्नाटक: एसोसिएशन ऑफ मेडिकल, इंजीनियरिंग एंड डेंटल कॉलेज ऑफ कर्नाटक (COMED-K) द्वारा आयोजित अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट (UGET) 2026 के नतीजे जारी होने के बाद इस बार कर्नाटक के छात्रों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस साल जारी टॉप 10 रैंक सूची में कर्नाटक का कोई भी छात्र जगह नहीं बना पाया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
परीक्षा के नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए, जिसमें इंजीनियरिंग डिग्री में प्रवेश के लिए देशभर के छात्रों ने हिस्सा लिया था। परिणामों के अनुसार, इस बार टॉप 10 रैंक पर कर्नाटक के बाहर के छात्रों का पूरी तरह दबदबा रहा है।
टॉप 10 अचीवर्स में सबसे अधिक छात्र झारखंड से हैं, जहां से कुल पांच छात्रों ने स्थान हासिल किया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तराखंड से एक-एक छात्र ने टॉप 10 में जगह बनाई है। यह आंकड़ा देश के विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
पिछले वर्ष 2025 के COMED-K परिणामों में कर्नाटक के छह छात्रों ने टॉप 10 में जगह बनाई थी, जिससे राज्य के प्रदर्शन को मजबूत माना गया था। लेकिन 2026 में स्थिति पूरी तरह बदल गई है और शीर्ष रैंकिंग में राज्य का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
हालांकि, टॉप 100 रैंक सूची में कर्नाटक के 30 छात्रों ने जगह बनाई है, जो यह दर्शाता है कि राज्य के छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह कमजोर नहीं रहा है, लेकिन शीर्ष स्तर पर उनकी उपस्थिति इस बार नहीं दिखी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कोचिंग पैटर्न में बदलाव और अन्य राज्यों के छात्रों की तैयारी में सुधार के कारण यह बदलाव देखने को मिला है। कई विशेषज्ञ इसे एक चेतावनी संकेत के रूप में देख रहे हैं कि कर्नाटक के छात्रों को और अधिक रणनीतिक तैयारी की आवश्यकता है।
COMED-K UGET परीक्षा कर्नाटक में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक प्रमुख परीक्षा मानी जाती है, जिसमें हर साल हजारों छात्र हिस्सा लेते हैं। इस परीक्षा के परिणाम राज्य और देश दोनों स्तरों पर काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इस साल के परिणामों के बाद शिक्षा जगत में इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या राज्य को अपनी शैक्षणिक तैयारी और परीक्षा रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है।
फिलहाल, टॉप 10 में कर्नाटक के किसी छात्र का न होना एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संकेत माना जा रहा है, जबकि टॉप 100 में 30 छात्रों की मौजूदगी कुछ हद तक संतुलन दर्शाती है।





