कर्नाटक

SIR ड्यूटी से कॉलेजों की पढ़ाई प्रभावित, कई सरकारी कॉलेजों में शिक्षक संकट

Kavita2
7 Oct 2026 11:08 AM IST
SIR ड्यूटी से कॉलेजों की पढ़ाई प्रभावित, कई सरकारी कॉलेजों में शिक्षक संकट
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बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR का असर अब उच्च शिक्षा संस्थानों की नियमित पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है। अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट सेमेस्टर समाप्ति की ओर हैं, लेकिन कई सरकारी कॉलेजों में कक्षाएं नियमित रूप से चलाने में मुश्किल हो रही है। इसकी मुख्य वजह बड़ी संख्या में शिक्षकों की SIR ड्यूटी पर तैनाती बताई जा रही है।

बेंगलुरु नॉर्थ यूनिवर्सिटी यानी BNU से संबद्ध कई कॉलेजों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। इन कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका था, लेकिन SIR ड्यूटी पर भेजे गए कई शिक्षक अभी तक नियमित रूप से कॉलेज वापस नहीं लौट पाए हैं। इसके कारण कई विषयों की कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और विद्यार्थियों का सिलेबस समय पर पूरा कराना चुनौती बन गया है।

कॉलेज प्रशासन और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया कि शैक्षणिक सत्र को देखते हुए शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से राहत दी जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे कॉलेजों में समय-सारिणी गड़बड़ा गई है।

सेमेस्टर समाप्त होने के करीब होने के कारण सबसे बड़ी चिंता सिलेबस पूरा कराने की है। कई कॉलेजों में छात्रों की आंतरिक परीक्षाएं, प्रायोगिक परीक्षाएं और अंतिम सेमेस्टर की तैयारी एक साथ चल रही है। यदि नियमित कक्षाएं नहीं होतीं तो विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में नुकसान हो सकता है।

शिक्षकों के अनुसार, जिन विषयों में पहले से ही फैकल्टी की कमी है, वहां स्थिति और खराब हो गई है। कई सरकारी कॉलेज सीमित शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। ऐसे में यदि उपलब्ध शिक्षकों को भी SIR ड्यूटी पर भेज दिया जाता है तो कुछ विभागों में कक्षाएं पूरी तरह प्रभावित हो जाती हैं।

बेंगलुरु नॉर्थ यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले कई कॉलेजों में छात्रों की संख्या काफी अधिक है। यहां अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट दोनों स्तरों पर नियमित पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सेमेस्टर के अंतिम चरण में विषयवार पुनरावृत्ति, प्रैक्टिकल और मूल्यांकन का काम अधिक होता है। लेकिन शिक्षक उपलब्ध न होने से यह पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है।

कॉलेजों के सामने एक और समस्या यह है कि चुनावी ड्यूटी में लगे शिक्षकों की जगह तत्काल वैकल्पिक फैकल्टी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कुछ संस्थानों में अतिथि शिक्षकों या दूसरे विभागों के फैकल्टी से कक्षाएं चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था सभी विषयों में कारगर नहीं हो पा रही।

छात्रों का कहना है कि कई दिनों तक विषय की कक्षा न होने से उन्हें नोट्स और पाठ्यक्रम समझने में कठिनाई हो रही है। कुछ विद्यार्थियों को स्वयं अध्ययन पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि कई विषय ऐसे हैं जिनमें नियमित शिक्षक की जरूरत होती है। खासकर विज्ञान, वाणिज्य और तकनीकी विषयों में प्रायोगिक और विश्लेषणात्मक पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें हैं।

SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। मतदाता सूची की जांच, सत्यापन, दावे-आपत्तियों के निपटारे और बूथ स्तर की जिम्मेदारियों में शिक्षकों को भी लगाया जाता है। प्रशासन के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि चुनावी जिम्मेदारियों और शैक्षणिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।

कई शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों और कॉलेजों के बीच भी ड्यूटी आवंटन में सावधानी बरतनी चाहिए। उच्च शिक्षा संस्थानों में सेमेस्टर प्रणाली होने के कारण कुछ सप्ताह की कक्षाएं प्रभावित होने से पूरे शैक्षणिक कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है।

कॉलेज प्राचार्यों का कहना है कि यदि शिक्षकों को लंबे समय तक SIR ड्यूटी पर रखना जरूरी है तो सरकार को वैकल्पिक शिक्षक उपलब्ध कराने चाहिए। इससे चुनावी कार्य भी प्रभावित नहीं होगा और छात्रों की पढ़ाई भी जारी रह सकेगी।

कुछ संस्थानों में शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से छात्रों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसे नियमित कक्षा का विकल्प नहीं माना जा रहा है। सभी छात्रों के पास समान डिजिटल संसाधन नहीं होते और कई विषयों में प्रत्यक्ष संवाद जरूरी होता है।

छात्र संगठनों और अभिभावकों की ओर से भी चिंता जताई जा रही है कि यदि सिलेबस समय पर पूरा नहीं हुआ तो परीक्षा परिणामों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को चुनावी प्रशासन की वजह से शैक्षणिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

शिक्षकों ने यह भी कहा कि SIR ड्यूटी की अवधि स्पष्ट न होने से कॉलेजों के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना मुश्किल हो रहा है। यदि यह पहले से पता हो कि कौन से शिक्षक कितने समय के लिए बाहर रहेंगे, तो विभाग बेहतर तरीके से वैकल्पिक समय-सारिणी तैयार कर सकते हैं।

सेमेस्टर समाप्ति के इस दौर में कॉलेजों में परीक्षाओं की तैयारी तेज होनी चाहिए थी, लेकिन कई जगह शिक्षक उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या बन गई है। यही कारण है कि कॉलेज प्रशासन अब उच्च शिक्षा विभाग और चुनाव अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए SIR जरूरी हो सकती है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों की नियमित गतिविधियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें चुनावी काम के लिए कर्मचारियों की तैनाती हो, लेकिन कॉलेजों की पढ़ाई बाधित न हो।

फिलहाल बेंगलुरु नॉर्थ यूनिवर्सिटी समेत कई सरकारी कॉलेजों में शिक्षक कमी के कारण कक्षाएं प्रभावित हैं। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी शिक्षकों को SIR ड्यूटी से कब तक राहत देते हैं और सेमेस्टर खत्म होने से पहले शैक्षणिक नुकसान की भरपाई के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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