
Karnataka कर्नाटक: राजधानी बेंगलुरु में रविवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने अपना पहला सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें NEET प्रश्न पत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
यह विरोध प्रदर्शन देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने शिक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने छात्रों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
Bengaluru में आयोजित इस प्रदर्शन में भारी बारिश के बावजूद 250 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में हो रही गड़बड़ियों को रोकने में प्रशासन विफल रहा है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के बीच डर का माहौल बनाकर असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना था कि NEET परीक्षा से जुड़े कथित लीक मामलों में प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन में सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भी भाग लिया। इनमें अभिनेता प्रकाश राज और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शामिल रहे। मंच पर ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) के सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद थे, जिन्होंने छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाई।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों से छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए ताकि योग्य छात्रों के साथ न्याय हो सके।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने पोस्टर और बैनर के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की और सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे देर तक अपनी मांगों पर अड़े रहे।
आयोजकों ने इसे सिर्फ एक शुरुआत बताया और कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
कुल मिलाकर, बेंगलुरु में हुआ यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।





