
बेंगलुरु : कर्नाटक में कावेरी नदी के पानी को लेकर किसानों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। मांड्या और कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय क्षेत्र के किसानों की ओर से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने का दबाव बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मांड्या और श्रीरंगपटना के विधायक तथा जिले के प्रभारी मंत्री इस मुद्दे को लेकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन पानी छोड़ने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कावेरी का पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जाएगा या नहीं, इसका फैसला सरकार की बैठक के बाद लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार के सामने किसानों की सिंचाई जरूरतों और लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।
कर्नाटक इस समय मानसून की अनिश्चित स्थिति से गुजर रहा है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की जा रही है, जिससे जलाशयों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में सरकार के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि उपलब्ध पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाए या भविष्य में पेयजल संकट को देखते हुए इसे सुरक्षित रखा जाए।
मांड्या और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान खेती के लिए कावेरी नदी के पानी पर निर्भर हैं। किसान संगठनों का कहना है कि खरीफ सीजन की फसलों के लिए समय पर सिंचाई पानी मिलना जरूरी है। यदि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों की मांग है कि कृष्णराज सागर बांध से नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाए, ताकि धान और अन्य फसलों की सिंचाई हो सके। उनका कहना है कि बारिश की कमी के बावजूद किसानों ने खेती की तैयारी की है और अब उन्हें पानी की जरूरत है।
वहीं, सरकार का कहना है कि जल संसाधनों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता। अधिकारियों को जलाशयों में पानी की उपलब्धता, मानसून की स्थिति और आने वाले महीनों में पेयजल की जरूरत का आकलन करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर बारिश में सुधार नहीं हुआ और जल भंडार की स्थिति कमजोर रही तो सरकार को पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देनी पड़ सकती है।
कावेरी जल प्रबंधन को लेकर कर्नाटक में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद होते रहे हैं। नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों की अपनी मांगें हैं। ऐसे में सरकार के लिए सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना जरूरी हो गया है।
कृष्णराज सागर जलाशय कर्नाटक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है, बल्कि बेंगलुरु और आसपास के कई क्षेत्रों की जल जरूरतों में भी इसकी अहम भूमिका है।
जल विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून की स्थिति में जल प्रबंधन की रणनीति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं आता है तो सिंचाई और पेयजल दोनों क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
किसान संगठनों ने सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की है। उनका कहना है कि देरी होने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं को समझते हुए ही निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल, सभी की नजर सरकार की आगामी बैठक पर है। इसी बैठक में यह तय हो सकता है कि कावेरी का पानी मांड्या और KRS क्षेत्र के किसानों के लिए छोड़ा जाएगा या नहीं। मानसून की स्थिति और जल भंडारण को देखते हुए सरकार का यह फैसला हजारों किसानों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





