कर्नाटक

सुबह-सुबह फिशिंग हार्बर पहुंचे CM, मछुआरों से बात कर सुनीं समस्याएं

Kavita2
19 Sept 2026 10:27 AM IST
सुबह-सुबह फिशिंग हार्बर पहुंचे CM, मछुआरों से बात कर सुनीं समस्याएं
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मंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार सुबह मंगलुरु फिशिंग हार्बर का अचानक दौरा किया। उनके साथ दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रभारी मंत्री यू.टी. खादर और स्थानीय नेता व अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बंदरगाह के धक्के इलाके में पैदल घूमकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मछुआरों तथा व्यापारियों से सीधे बातचीत की।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री शिवकुमार फिशिंग हार्बर पहुंचे। सुबह के समय बंदरगाह पर मछली पकड़ने वाली नावों के लौटने और ताजी मछलियों की बिक्री की गतिविधियां चल रही थीं। मुख्यमंत्री ने समुद्र से लौटी नौकाओं को करीब से देखा और मछली कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर वहां मौजूद मछुआरों और व्यापारियों में उत्साह दिखाई दिया। शिवकुमार ने उनसे बातचीत करते हुए बंदरगाह में उपलब्ध सुविधाओं, मछली कारोबार और रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से भी फिशिंग हार्बर की मौजूदा व्यवस्था और आगे की योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री का अलग अंदाज भी देखने को मिला। वह मछुआरों के बीच पहुंचे और समुद्र से लाई गई ताजी मछलियों को देखा। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मछलियों को हाथ में लेकर भी देखा और मछुआरों से उनके कामकाज के बारे में बातचीत की।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को तटीय कर्नाटक में मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेने से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे एक दिन पहले मंगलुरु में राज्य मंत्रिमंडल की विशेष बैठक हुई थी, जिसमें तटीय कर्नाटक के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर फैसले लिए गए।

विशेष कैबिनेट बैठक में मत्स्य क्षेत्र भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रहा। सरकार ने मंगलुरु के कॉलेज ऑफ फिशरीज को फिशरीज एंड ब्लू इकोनॉमी यूनिवर्सिटी के रूप में अपग्रेड करने को मंजूरी दी है। इसके साथ छात्र क्षमता को 60 से बढ़ाकर 200 करने और इसके लिए 11.5 करोड़ रुपये आवंटित करने की जानकारी सामने आई है।

इसके अलावा उडुपी जिले में कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन बायोटेक्नोलॉजी एंड ब्लू इकोनॉमी स्थापित करने की दिशा में भी काम करने की योजना है। सरकार ने संबंधित विभाग को इसका खाका तैयार करने को कहा है। इन फैसलों का उद्देश्य तटीय क्षेत्र में मत्स्य उद्योग, समुद्री अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना बताया गया है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने फिशिंग हार्बर के दौरे के दौरान स्थानीय मछुआरों की शिकायतों और मांगों को भी सुना। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। अधिकारियों को बंदरगाह की सुविधाओं और विभागीय योजनाओं से जुड़े विषयों पर आवश्यक जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए।

तटीय कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में मछली उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ जिलों में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मछली पकड़ने, मछली प्रसंस्करण, परिवहन और निर्यात से जुड़े हुए हैं। इसी वजह से बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और मछुआरों के लिए सुविधाओं में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है।

हाल के दिनों में राज्य सरकार ने तटीय क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर देने की बात कही है। मंगलुरु में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में पर्यटन, मत्स्य पालन, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क और बंदरगाह विकास से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा और फैसले किए गए। सरकार ने तटीय कर्नाटक को पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने रखी है।

इससे पहले राज्य के मत्स्य और बंदरगाह विभाग से जुड़े मंत्री ने मालपे फिशिंग हार्बर के आधुनिकीकरण और मछुआरों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने की बात कही थी। मछुआरा संगठनों ने सरकार के सामने सब्सिडी, मुआवजा, समुद्री एंबुलेंस और बंदरगाह सुविधाओं में सुधार जैसी मांगें रखी हैं।

मुख्यमंत्री का शनिवार का दौरा बिना किसी बड़े औपचारिक कार्यक्रम के हुआ। वह सीधे बंदरगाह क्षेत्र में पहुंचे और वहां काम कर रहे लोगों के बीच जाकर परिस्थितियों को समझने की कोशिश की। स्थानीय अधिकारियों के साथ-साथ मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहे।

मंगलुरु में एक दिन पहले हुई कैबिनेट बैठक भी खास रही। राज्य सरकार ने तटीय क्षेत्र के लिए 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास प्रस्तावों का पैकेज सामने रखा। इसमें पर्यटन और बुनियादी ढांचे के साथ मत्स्य एवं समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने तटीय और मलनाड क्षेत्रों से प्रतिभाओं के पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक अवसर बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। सरकार का कहना है कि क्षेत्र की पुरानी मांगों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

फिशिंग हार्बर के इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने मछुआरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की। अब स्थानीय मछुआरा समुदाय की नजर इस बात पर रहेगी कि बंदरगाह की सुविधाओं और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

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