कर्नाटक

सूखे से परेशान किसान से CM बोले मैं हूं न

Kavita2
5 Sept 2026 10:49 AM IST
सूखे से परेशान किसान से CM बोले मैं हूं न
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बागलकोट। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को बागलकोट जिले में सूखे और फसलों की स्थिति का जायजा लिया। हुनागुंडा में उन्होंने युवा किसान नंदेप्पा संगप्पा बराकेरा और उनके परिवार से मुलाकात कर खेती की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने किसान से बारिश, बुवाई, फसल और खेती पर हुए खर्च तक के बारे में सवाल किए। सूखे के कारण परेशान किसान ने जब अपनी पीड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखी तो शिवकुमार ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए भरोसा दिलाया, “मैं हूं न।”

मुख्यमंत्री ने किसान के माता-पिता का भी हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सूखे और फसल खराब होने से निराश होने की जरूरत नहीं है, सरकार किसानों के साथ खड़ी है। इस दौरान उन्होंने परिवार से यह भी पूछा कि राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं।

किसान से पूछा कब हुई बारिश और कब की बुवाई

सूखे का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री ने नंदेप्पा से खेती से जुड़ी जानकारी सीधे हासिल की। उन्होंने पूछा कि इलाके में बारिश कब शुरू हुई, किसान ने बुवाई कब की और फसल तैयार करने में अब तक कितना खर्च हुआ।

मुख्यमंत्री ने खेत और फसल की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। बातचीत का उद्देश्य यह समझना था कि कम बारिश का किसानों की खेती और आर्थिक स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने किसान परिवार से सीधे संवाद कर यह जानने की कोशिश की कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को किन परेशानियों का सबसे अधिक सामना करना पड़ रहा है।

‘मेरी किस्मत इतनी खराब क्यों है?’

मुख्यमंत्री के सामने अपनी परेशानी बताते हुए नंदेप्पा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “सर, इस साल अच्छी बारिश नहीं हुई, इसलिए मैंने मिर्च की फसल लगाई थी। मेरी किस्मत इतनी खराब क्यों है?”

किसान की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, “मैं हूं न।” उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि सरकार मुश्किल परिस्थितियों में किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने किसान के माता-पिता से भी कहा कि वे यह सोचकर निराश न हों कि सूखा पड़ गया और फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ है और किसानों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी।

किसान परिवार को दिया भरोसा

शिवकुमार ने कहा, “यह मत सोचिए कि सूखा पड़ गया है और फसल बर्बाद हो गई है। मैं और हमारी सरकार आपके साथ हैं।”

मुख्यमंत्री का कहना था कि उनका दौरा केवल खेतों को देखकर सूखे का आकलन करने तक सीमित नहीं है। वे किसानों और उनके परिवारों की वास्तविक स्थिति को भी समझना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि संकट का प्रभाव केवल फसल तक सीमित नहीं रहता। इसका असर किसान की आमदनी और पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसलिए किसानों से सीधे बातचीत करना जरूरी है।

गारंटी योजनाओं की भी ली जानकारी

किसान परिवार से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पूछा, “क्या गारंटी योजनाएं आप तक पहुंच रही हैं?”

इस सवाल के जरिए मुख्यमंत्री ने यह जानने की कोशिश की कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों को मिल रहा है या नहीं।

सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सीधे लाभार्थियों से बातचीत को महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे प्रशासन को यह पता चलता है कि योजना के लाभ पहुंचने में कहीं कोई समस्या तो नहीं आ रही।

उत्तरी कर्नाटक के किसानों पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह केवल सूखे की स्थिति देखने के लिए नहीं निकले हैं, बल्कि उत्तरी कर्नाटक के किसानों की जिंदगी और उनकी परेशानियों को भी करीब से समझ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ सूखे का जायजा नहीं ले रहा हूं, बल्कि उत्तरी कर्नाटक के किसानों की जिंदगी को भी देख रहा हूं। मेरी पहली प्राथमिकता किसानों की मुश्किलों का समाधान करना है।”

मुख्यमंत्री के इस बयान से संकेत मिलता है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार जमीनी स्तर से जानकारी जुटा रही है।

कम बारिश से खेती पर असर

कम बारिश कृषि पर सीधा असर डालती है। खासकर वे किसान अधिक प्रभावित होते हैं जिनकी खेती बारिश पर निर्भर है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल की वृद्धि प्रभावित होने के साथ उत्पादन घटने का खतरा रहता है।

किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों में पहले ही पैसा खर्च कर चुके होते हैं। ऐसे में बारिश कम होने और फसल खराब होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

नंदेप्पा ने भी मुख्यमंत्री के सामने इसी तरह की चिंता रखी। मिर्च की फसल लगाने के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से वह परेशान थे।

किसानों की समस्याओं का समाधान पहली प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों की परेशानियों का समाधान उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। खेतों का निरीक्षण और किसानों से बातचीत के जरिए सरकार वास्तविक स्थिति का आकलन कर रही है।

इस तरह के दौरों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर प्रशासन प्रभावित इलाकों की जरूरतों का आकलन कर सकता है। फसल की स्थिति और किसानों को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी जुटाने के बाद राहत से संबंधित आगे के फैसले लिए जा सकते हैं।

‘मैं हूं न’ कहकर बढ़ाया हौसला

बागलकोट के हुनागुंडा में मुख्यमंत्री और किसान परिवार के बीच हुई बातचीत का सबसे भावुक पल तब आया जब नंदेप्पा ने अपनी खराब किस्मत का जिक्र किया। किसान की चिंता सुनकर मुख्यमंत्री ने उसके कंधे पर हाथ रखकर “मैं हूं न” कहते हुए भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने परिवार से निराश नहीं होने को कहा और सरकार के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि सूखे के आकलन के बाद सरकार प्रभावित क्षेत्रों और किसानों के लिए क्या कदम उठाती है।

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