
बेंगलुरु। कर्नाटक में रविवार, 1 नवंबर 2026 को 71वां कन्नड़ राज्योत्सव धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजधानी बेंगलुरु के कांतिरवा स्टेडियम में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने मां भुवनेश्वरी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और राष्ट्रीय ध्वज के साथ कर्नाटक का पारंपरिक पीले-लाल रंग का ध्वज भी फहराया। इसके बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राज्य के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों ने कन्नड़ गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। पूरे स्टेडियम में कन्नड़ भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव का उत्साह देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने ध्वजारोहण कर की समारोह की शुरुआत
कांतिरवा स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सबसे पहले मां भुवनेश्वरी को पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज और कन्नड़ ध्वज फहराकर राज्योत्सव समारोह का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा, मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समारोह में विद्यार्थियों की मार्च पास्ट और अन्य प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्कूलों से पहुंचे विद्यार्थियों के कार्यक्रमों का अवलोकन किया।
कन्नड़ गीतों पर बच्चों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। राज्य के अलग-अलग जिलों से आए छात्र-छात्राओं ने कन्नड़ भाषा के लोकप्रिय गीतों और पारंपरिक संगीत की धुनों पर नृत्य प्रस्तुत किए।
बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की लोक संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय विरासत को दर्शाया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने मंच पर शानदार प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया।
कन्नड़ गीतों पर सामूहिक नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को विशेष बना दिया। बच्चों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव बनाए हुए है।
कन्नड़ भाषा और संस्कृति को समर्पित है राज्योत्सव
कन्नड़ राज्योत्सव केवल एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि कर्नाटक की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उत्सव है। प्रत्येक वर्ष एक नवंबर को यह दिवस राज्य के गठन की स्मृति में मनाया जाता है।
एक नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान विभिन्न कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर तत्कालीन मैसूर राज्य का गठन किया गया था। बाद में एक नवंबर 1973 को इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया।
इसी ऐतिहासिक अवसर की याद में हर साल राज्यभर में ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शोभायात्राएं और साहित्यिक आयोजन किए जाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संगठनों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
पीले और लाल ध्वज के साथ दिखाई दिया कन्नड़ गौरव
कर्नाटक का पारंपरिक पीले और लाल रंग का ध्वज राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान का प्रतीक माना जाता है। राज्योत्सव के मौके पर राजधानी सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में यह ध्वज फहराया गया।
कन्नड़ भाषा के सम्मान और उसके प्रचार-प्रसार को लेकर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने अपने घरों, दुकानों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर कन्नड़ ध्वज लगाकर राज्योत्सव की खुशियां मनाईं।
राज्य के कई हिस्सों में कन्नड़ गीतों, लोकनृत्यों और पारंपरिक कलाओं के आयोजन किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कन्नड़ साहित्य, भाषा, इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।
राज्यभर में आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
बेंगलुरु के अलावा मैसूर, बेल्लारी, हुबली, धारवाड़, कलबुर्गी, शिवमोग्गा और अन्य जिलों में भी राज्योत्सव को लेकर विशेष आयोजन किए गए। सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में ध्वजारोहण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
लोककलाओं में डोल्लू कुनिता, यक्षगान और अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया गया। साहित्यिक कार्यक्रमों और संगीत आयोजनों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
71वें राज्योत्सव पर विकास और सांस्कृतिक विरासत का संदेश
इस वर्ष का राज्योत्सव कर्नाटक की ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की संभावनाओं को याद करने का अवसर भी रहा। राज्य ने शिक्षा, तकनीक, उद्योग, कृषि, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी राज्योत्सव के अवसर पर भाषा, शिक्षा, रोजगार और किसानों से संबंधित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। समारोह के दौरान कन्नड़ भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
स्कूली बच्चों की भागीदारी ने समारोह को विशेष रूप दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों से यह संदेश भी सामने आया कि भाषा और संस्कृति का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज और नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी से संभव है।
शाम को 71 प्रतिभाओं को मिलेगा राज्योत्सव सम्मान
कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर शाम को 71 विशिष्ट व्यक्तियों को कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कारों से सम्मानित करने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है। साहित्य, कला, शिक्षा, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को यह सम्मान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर कांतिरवा स्टेडियम में आयोजित 71वें कन्नड़ राज्योत्सव समारोह में ध्वजारोहण, मां भुवनेश्वरी को श्रद्धांजलि और स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने कर्नाटक की भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव की भावना को एक बार फिर केंद्र में ला दिया।





