
बेंगलुरु। कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक सरकार ने अपनी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को राज्य में कावेरी जल की मौजूदा स्थिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के हालिया निर्देशों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जल विवाद और इस मामले में राज्य सरकार की आगे की रणनीति तय करने के लिए 2 अगस्त को बेंगलुरु में सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘कृष्णा’ में होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में कावेरी बेसिन से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विधायकों को आमंत्रित किया गया है। इस दौरान राज्य के जल हितों की रक्षा, कानूनी विकल्पों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु को अतिरिक्त पानी नहीं छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तमिलनाडु की ओर केवल वही पानी जा रहा है, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह के कारण बह रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कावेरी जल के उपयोग और वितरण को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
यह बैठक कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के उस फैसले के बाद हुई है, जिसमें प्राधिकरण ने कर्नाटक के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कावेरी जल नियंत्रण समिति (CWRC) की सिफारिश को बरकरार रखा। इसके तहत तमिलनाडु को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
कर्नाटक सरकार का तर्क रहा है कि राज्य में बारिश की स्थिति और जल उपलब्धता को देखते हुए पानी छोड़ने का फैसला चुनौतीपूर्ण है। राज्य सरकार का कहना है कि किसानों, पेयजल जरूरतों और जलाशयों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में कावेरी जल विवाद को लेकर राज्य के सभी पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे राज्य के हितों से जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी दलों को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है।
कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों राज्यों के बीच नदी जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है। इस मामले में कई बार न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप भी हुआ है।
कर्नाटक के किसान संगठन भी समय-समय पर तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि कम बारिश और जलाशयों में सीमित पानी की उपलब्धता के बीच राज्य के किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वहीं, तमिलनाडु की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही है कि कावेरी जल बंटवारे से जुड़े तय नियमों का पालन किया जाए और राज्य को उसके हिस्से का पानी नियमित रूप से मिले।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि बैठक में कानूनी और राजनीतिक दोनों विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
सर्वदलीय बैठक को कावेरी विवाद के अगले चरण की रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और सरकार सभी पक्षों की राय के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
कावेरी जल विवाद को लेकर दोनों राज्यों में राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रहती है। ऐसे में कर्नाटक सरकार की यह पहल आने वाले दिनों में राज्य के रुख को स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकती है।





