कर्नाटक

CM शिवकुमार का नया कदम, कर्मचारियों से सीधा संवाद

Kavita2
30 July 2026 1:33 PM IST
CM शिवकुमार का नया कदम, कर्मचारियों से सीधा संवाद
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पारंपरिक नौकरशाही पदानुक्रम को दरकिनार करते हुए राज्य के सरकारी कर्मचारियों से सीधे संवाद स्थापित करने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों से सीधे फीडबैक लेना और प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद समस्याओं को समझना है।

इस संबंध में 28 जुलाई को एक सरकारी सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें राज्य के सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी जगहों की पहचान करें, जहां ऑडियो-विजुअल सुविधाएं और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध हो। इन स्थानों पर मुख्यमंत्री और सरकारी कर्मचारियों के बीच लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत आयोजित की जाएगी।

सरकार की योजना है कि मुख्यमंत्री राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कार्यरत कर्मचारियों से सीधे जुड़कर उनकी समस्याएं, सुझाव और प्रशासनिक चुनौतियों को समझें। इसके लिए जिला स्तर से लेकर होबली स्तर तक बैठकें आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

जारी निर्देशों के अनुसार, जिला स्तर पर 500 से 1,000 सरकारी कर्मचारियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, तालुक स्तर पर 200 से 500 कर्मचारियों और होबली स्तर पर 100 से 200 कर्मचारियों को शामिल करने की योजना बनाई गई है।

जिला कलेक्टरों को इन बैठकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, अधिकारियों से नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने और कार्यक्रमों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की योजना है कि वह प्रत्येक जिले में कम से कम एक तालुक और एक होबली स्तर पर कर्मचारियों के साथ सीधे बातचीत करें। इसके जरिए सरकार यह जानने की कोशिश करेगी कि योजनाओं को लागू करने में कर्मचारियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और प्रशासनिक स्तर पर कौन-कौन सी बाधाएं सामने आ रही हैं।

यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, नौकरशाही की धीमी प्रक्रिया और लालफीताशाही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार का मानना है कि कई बार नीतियां और योजनाएं तैयार तो हो जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन में दिक्कतें आती हैं।

मुख्यमंत्री सीधे कर्मचारियों से बातचीत कर इन समस्याओं की पहचान करना चाहते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस संवाद प्रक्रिया से प्रशासनिक तंत्र में बेहतर समन्वय स्थापित होगा और कर्मचारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

अधिकारियों के अनुसार, जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी ही सरकारी योजनाओं और सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके अनुभव और सुझाव प्रशासनिक सुधारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

सरकार का मानना है कि कर्मचारियों से सीधा संवाद होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली अड़चनों को जल्दी पहचाना जा सकेगा। इसके अलावा, कर्मचारियों को भी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

इस पहल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक नए प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। आमतौर पर सरकारी व्यवस्था में संदेश और निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से नीचे तक पहुंचते हैं, लेकिन इस व्यवस्था में मुख्यमंत्री सीधे फील्ड स्तर के कर्मचारियों से जुड़ेंगे।

हालांकि, इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी व्यवस्था और बेहतर समन्वय जरूरी होगा। सभी जिलों में पर्याप्त इंटरनेट सुविधा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था और कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

कर्नाटक सरकार को उम्मीद है कि यह पहल प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद करेगी। सीधे संवाद के माध्यम से मुख्यमंत्री न केवल कर्मचारियों की समस्याओं को समझ सकेंगे, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और योजनाओं के बारे में भी उन्हें स्पष्ट दिशा-निर्देश दे सकेंगे।

अब सभी जिलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में मुख्यमंत्री का कर्मचारियों के साथ यह सीधा संवाद कार्यक्रम राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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