कर्नाटक

सरकारी स्कूल में पानी के लिए बच्चों की जद्दोजहद, 100 फीट दूर कुएं से पानी लाने को मजबूर छात्र

Kavita2
24 Sept 2026 12:10 PM IST
सरकारी स्कूल में पानी के लिए बच्चों की जद्दोजहद, 100 फीट दूर कुएं से पानी लाने को मजबूर छात्र
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उत्तर कन्नड़। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में सरकारी प्राथमिक स्कूल के छात्रों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। होन्नावर शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर होडिके शिरूर स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को कथित तौर पर शौचालय की जरूरतों के लिए करीब 100 फीट दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, छात्रों को पीने के लिए भी घर से पानी लाने की जरूरत पड़ रही है। स्कूल से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में कथित तौर पर स्कूल के छात्र कुएं से पानी लाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को यह जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। बच्चों की इस स्थिति को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने स्कूल तथा जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा जाता है, लेकिन वहां बुनियादी सुविधाओं में शामिल पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में छात्रों को खुद कुएं से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, स्कूल से करीब 100 फीट की दूरी पर एक कुआं स्थित है। इसी कुएं से छात्र पानी लेकर स्कूल परिसर तक पहुंचते हैं। पानी का इस्तेमाल शौचालय समेत अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जाता है। छात्रों को पीने के पानी के लिए भी खुद व्यवस्था करनी पड़ रही है।

मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद अभिभावकों ने प्रशासन से स्कूल में पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की। उनका कहना है कि बच्चों को इस तरह पानी ढोने के लिए मजबूर करना उचित व्यवस्था नहीं है।

हालांकि, स्कूल अधिकारियों ने स्थानीय लोगों के आरोपों को खारिज किया है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि पानी की समस्या स्थायी नहीं है, बल्कि पाइपलाइन खराब होने के कारण कुछ समय के लिए यह स्थिति बनी थी। अधिकारियों के मुताबिक पाइपलाइन में खराबी आने की वजह से स्कूल में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई और इसी दौरान छात्रों को कुएं से पानी लाना पड़ा।

स्कूल प्रशासन की ओर से इसे अस्थायी समस्या बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पानी की पाइपलाइन में खराबी के कारण कुछ समय के लिए स्कूल में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पाई। इसी वजह से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कुएं से पानी लाया जा रहा था।

हालांकि, स्थानीय लोगों का दावा स्कूल प्रशासन के बयान से अलग है। उनका कहना है कि यह समस्या केवल कुछ दिनों या थोड़े समय की नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार छात्र पिछले कुछ महीनों से इसी तरह कुएं से पानी लाकर स्कूल की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इस दावे ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों पर पानी लाने की जिम्मेदारी पड़ने से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। छोटे बच्चों को स्कूल की जरूरतों के लिए पानी लाने के लिए भेजे जाने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। लोगों की मांग है कि स्कूल में जलापूर्ति की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि छात्रों को बाहर से पानी लाने की जरूरत न पड़े।

इस मामले में स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जहां स्कूल अधिकारी पाइपलाइन की खराबी को अस्थायी समस्या बता रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे लंबे समय से पानी लाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में वास्तविक स्थिति क्या है, इसे प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट किया जा सकता है।

स्कूलों में पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं छात्रों के लिए जरूरी होती हैं। खासकर प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पानी की नियमित उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में होडिके शिरूर के सरकारी स्कूल से सामने आई तस्वीरों ने स्कूल की सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने और स्कूल में पानी की समस्या को दूर करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पाइपलाइन खराब है तो उसकी मरम्मत जल्द कराई जानी चाहिए और तब तक बच्चों को पानी लाने के बजाय वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद यह मामला सामने आया है। स्कूल प्रशासन ने इसे पाइपलाइन की खराबी के कारण पैदा हुई अस्थायी समस्या बताया है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि बच्चे कई महीनों से कुएं से पानी ला रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्कूल में पानी की समस्या कितने समय से बनी हुई है और इसे स्थायी रूप से दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

मामले ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और स्कूल में पानी की नियमित व्यवस्था कब तक बहाल होती है।

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