
Karnataka कर्नाटक: चिकमगलुरु जिले के कलासा तालुक में एक दुर्लभ सिवेट बिल्ली के रिहायशी इलाके में भटक आने का मामला सामने आया, जिसके बाद वन विभाग और वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जानवर को सुरक्षित बचा लिया। बाद में उसे इलाज के बाद कुद्रेमुख नेशनल पार्क के जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार, यह घटना कलासा तालुक स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के पास हुई, जहां स्थानीय लोगों ने एक घायल और डरी हुई सिवेट बिल्ली को देखा। बताया जा रहा है कि यह जानवर पास के एक बागान से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंच गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आवारा कुत्तों के पीछा करने के कारण सिवेट बिल्ली जंगल से बाहर आ गई और भागते-भागते आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच गई।
डर और चोट के कारण सिवेट बिल्ली ने कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के पास शरण ली, जहां लोगों ने उसे देखा और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम, जिसमें स्नेक रिजवान और वन विभाग के अधिकारी शामिल थे, मौके पर पहुंची।
रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक जानवर को पकड़कर सुरक्षित किया। अधिकारियों के अनुसार, कुत्तों के हमले और पीछा करने के दौरान सिवेट बिल्ली को मामूली चोटें आई थीं। उसे तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया और आवश्यक देखभाल प्रदान की।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिवेट बिल्ली एक दुर्लभ वन्यजीव प्रजाति है और आमतौर पर यह मानव बस्तियों से दूर जंगलों में पाई जाती है। ऐसे में उसका रिहायशी इलाके में आना असामान्य माना जाता है। अधिकारियों ने इसे संभवतः कुत्तों के पीछा करने और प्राकृतिक आवास से भटकने का परिणाम बताया।
इलाज के बाद जानवर की स्थिति में सुधार होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने का निर्णय लिया गया। इसके तहत उसे कुद्रेमुख नेशनल पार्क के घने जंगलों में सुरक्षित रूप से रिहा किया गया।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग और रेस्क्यू टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। लोगों का कहना है कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती, तो यह दुर्लभ वन्यजीव गंभीर रूप से घायल हो सकता था या उसकी जान भी जा सकती थी।
वन विभाग ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार का वन्यजीव रिहायशी इलाके में दिखाई दे तो उसे छेड़ने या डराने के बजाय तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें। साथ ही आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर भी स्थानीय प्रशासन से सहयोग की बात कही गई है।
कुल मिलाकर, चिकमगलुरु की यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण की एक सफल मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर की गई कार्रवाई से दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में लौटाया जा सकता है।





