
चित्रदुर्ग। लंबे समय से प्रतीक्षित ऊपरी भद्रा परियोजना के तहत छोड़ा गया पानी गोनूर झील तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के अवसर पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार 24 सितंबर को गोनूर झील पर गंगा पूजा करेंगे। कार्यक्रम के बाद चित्रदुर्ग शहर में एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी। इसमें पूर्व और वर्तमान मंत्रियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
मंत्री टी. रघुमूर्ति ने शनिवार को हिरियूर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चित्रदुर्ग शाखा नहर से प्रयोग के तौर पर छोड़ा गया पानी अब गोनूर झील तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने वाई-जंक्शन से 114 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से 3 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के बाद पानी की आपूर्ति शुरू की गई और अब यह निर्धारित झील तक पहुंच गई है।
ऊपरी भद्रा परियोजना इस क्षेत्र के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित थी। परियोजना के माध्यम से हिरियूर, होसादुर्गा, चित्रदुर्ग, चल्लाकेरे, कदूर और तारिकेरे तालुकों में स्थित लगभग 80 झीलों को भरने का लक्ष्य रखा गया है। इन क्षेत्रों में पानी पहुंचने से स्थानीय जलस्रोतों को मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
मंत्री रघुमूर्ति ने कहा कि गोनूर झील तक पानी पहुंचना केवल सरकार या किसी एक राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लोगों का लंबा संघर्ष और निरंतर प्रयास है। उन्होंने इस परियोजना को जनता के सामूहिक आंदोलन और मांगों का परिणाम बताया।
गोनूर झील पर होने वाली गंगा पूजा को परियोजना की प्रगति से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पूजा के माध्यम से झील में पहुंचे पानी का स्वागत करेंगे। इसके बाद होने वाली जनसभा में परियोजना की प्रगति, क्षेत्र के लिए इसके महत्व और आगे की योजना पर चर्चा होने की संभावना है।
कार्यक्रम में मौजूदा मंत्रियों के साथ पूर्व मंत्रियों को भी आमंत्रित किए जाने की तैयारी है। इसके अलावा विभिन्न स्तरों पर चुने गए जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। जनसभा को बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई गई है, क्योंकि गोनूर झील तक पानी पहुंचने का क्षेत्र के लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
चित्रदुर्ग शाखा नहर से पानी छोड़ने की प्रक्रिया को प्रयोग के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य नहर के माध्यम से पानी के प्रवाह की स्थिति और निर्धारित स्थान तक उसकी पहुंच को देखना था। वाई-जंक्शन से गोनूर झील तक नहर की लंबाई 114 किलोमीटर बताई गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसके जरिए 3 टीएमसी पानी छोड़ा गया।
इतनी लंबी दूरी तय करने के बाद पानी का गोनूर झील तक पहुंचना परियोजना से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे नहर के इस हिस्से से जल आपूर्ति की व्यावहारिक स्थिति सामने आई है। अब परियोजना के तहत चिह्नित अन्य झीलों तक पानी पहुंचाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा।
ऊपरी भद्रा परियोजना के तहत छह तालुकों की लगभग 80 झीलों को भरे जाने का लक्ष्य है। इनमें हिरियूर, होसादुर्गा, चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे के अलावा कदूर तथा तारिकेरे तालुक शामिल हैं। परियोजना का दायरा कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्थानीय जलस्रोत इससे जुड़े हैं।
मंत्री के अनुसार इस परियोजना के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने लंबे समय तक प्रयास किए। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर लगातार मांग उठाई गई और लोगों ने संघर्ष किया। इसी वजह से मंत्री ने इसे किसी पार्टी विशेष की उपलब्धि बताने से इनकार किया।
टी. रघुमूर्ति ने कहा कि परियोजना को राजनीतिक श्रेय की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। यह उन सभी लोगों के प्रयासों का परिणाम है जिन्होंने लंबे समय तक पानी की मांग को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने परियोजना को जनता के हित से जुड़ा प्रयास बताते हुए सभी पक्षों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।
गोनूर झील तक पानी पहुंचने की खबर से आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल बनने की उम्मीद है। जिन इलाकों की झीलों को परियोजना में शामिल किया गया है, वहां के लोग इसके पूर्ण क्रियान्वयन का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। पहली बार प्रयोग के तौर पर छोड़े गए पानी का निर्धारित स्थान तक पहुंचना परियोजना के अगले चरणों के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।
24 सितंबर को होने वाली गंगा पूजा के दौरान मुख्यमंत्री परियोजना स्थल का निरीक्षण भी कर सकते हैं। हालांकि मंत्री की ओर से मुख्य रूप से गंगा पूजा और जनसभा की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम के विस्तृत कार्यक्रम और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी बाद में सामने आने की संभावना है।
चित्रदुर्ग में आयोजित होने वाली जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। पूर्व एवं वर्तमान मंत्रियों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण यह आयोजन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहेगा। जनसभा में परियोजना को लेकर जनता के प्रयासों को याद किया जा सकता है।
ऊपरी भद्रा परियोजना से जुड़ी सबसे बड़ी उम्मीद चिह्नित झीलों तक पानी पहुंचाने की है। लगभग 80 झीलों को भरने का लक्ष्य पूरा होने पर संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध जल भंडार को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। फिलहाल गोनूर झील तक पानी पहुंचने से परियोजना के प्रति लोगों की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
मंत्री रघुमूर्ति ने स्पष्ट किया कि पानी पहुंचाने का मौजूदा प्रयास प्रायोगिक है। इसके तहत छोड़े गए 3 टीएमसी पानी की प्रगति पर नजर रखी जा रही है। इस प्रक्रिया से नहर में पानी के प्रवाह और झील तक उसकी पहुंच का आकलन करने में मदद मिलेगी।
गोनूर झील पर होने वाली गंगा पूजा क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने के प्रतीक के तौर पर आयोजित की जाएगी। मंत्री ने सभी संबंधित लोगों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस उपलब्धि का श्रेय किसी एक दल को नहीं दिया जा सकता।
फिलहाल प्रशासन 24 सितंबर के कार्यक्रम की तैयारी में जुटा है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की गंगा पूजा और इसके बाद प्रस्तावित बड़ी जनसभा के कारण गोनूर झील तथा चित्रदुर्ग शहर दोनों स्थानों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। इस आयोजन के साथ ऊपरी भद्रा परियोजना की प्रगति और लगभग 80 झीलों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आएगा।





