कर्नाटक

KEA भर्ती नीति के विरोध पर मुख्यमंत्री ने छात्रों को दिया समाधान का भरोसा

Kavita2
5 Aug 2026 2:28 PM IST
KEA भर्ती नीति के विरोध पर मुख्यमंत्री ने छात्रों को दिया समाधान का भरोसा
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बेंगलुरु। कर्नाटक में कृषि विश्वविद्यालयों के छात्रों द्वारा कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) की भर्ती नीति के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने छात्रों को उनकी मांगों पर सकारात्मक और कानूनी समाधान का भरोसा दिलाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।

मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित 'बैंगलोर इंडिया नैनो समिट' के उद्घाटन समारोह के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (UAS) के छात्र मुख्यमंत्री से मिले। छात्रों ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों और आपत्तियों से अवगत कराया। इस दौरान राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे भी मौजूद रहे और उन्होंने भी छात्रों से बातचीत कर उनकी बात सुनी।

छात्रों का विरोध कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) के उस फैसले को लेकर है, जिसके तहत बीई (BE) और बीटेक (B.Tech) डिग्रीधारकों को भी एग्रीकल्चर ऑफिसर (AO) और असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (AAO) के पदों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी गई है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि कृषि विभाग के इन तकनीकी और विशेषज्ञता वाले पदों पर केवल उन्हीं अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी चाहिए जिन्होंने कृषि विज्ञान में औपचारिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। उनका तर्क है कि कृषि क्षेत्र से संबंधित नीतियों, फसलों, मिट्टी, सिंचाई, बीज प्रबंधन और किसानों से जुड़े तकनीकी विषयों की समझ कृषि स्नातकों के पास ही होती है।

छात्रों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि भर्ती नियमों में संशोधन कर इन पदों के लिए पात्रता केवल कृषि स्नातकों तक सीमित की जाए। उनका कहना है कि यदि अन्य तकनीकी शाखाओं के अभ्यर्थियों को भी समान अवसर दिया गया तो कृषि स्नातकों के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने छात्रों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ऐसा समाधान निकाला जाएगा जो न्यायसंगत और कानून के अनुरूप हो।

उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में विश्वास करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी निर्णय में छात्रों के हितों और राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी चिंताओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उचित स्तर पर चर्चा के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पिछले कुछ दिनों से कृषि विश्वविद्यालयों के छात्र KEA की भर्ती नीति के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि अधिकारियों के पदों के लिए विशेष कृषि शिक्षा आवश्यक है और इन पदों पर गैर-कृषि पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को अनुमति देना उचित नहीं है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि कृषि विभाग के कई पदों पर कार्य करने के लिए विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक होती है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि यदि भर्ती नियमों में बदलाव किया जाता है तो उसका स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

सरकार अब इस मामले में कृषि विभाग, कार्मिक विभाग और कानूनी विशेषज्ञों से राय लेकर आगे की रणनीति तय कर सकती है। यदि आवश्यक हुआ तो भर्ती नियमों में संशोधन या पात्रता मानदंडों की समीक्षा भी की जा सकती है।

फिलहाल मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद छात्रों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक वे अपने आंदोलन को जारी रखने पर विचार करेंगे।

अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार छात्रों की मांगों के अनुरूप कोई निर्णय लेती है तो इससे कृषि स्नातकों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि मौजूदा नीति बरकरार रहती है तो इस मुद्दे पर विवाद और गहरा सकता है। ऐसे में सरकार के लिए संतुलित और कानूनी रूप से मजबूत निर्णय लेना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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