
Karnataka कर्नाटक: केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा है कि केंद्र सरकार श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 29 श्रम कानूनों में संशोधन कर उन्हें चार श्रम संहिताओं के तहत लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है, जिनमें सामाजिक सुरक्षा संहिता सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस संहिता के लागू होने के बाद देश के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और ESI जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार हर साल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये तक की सहायता देती है, जिससे श्रमिक योजनाओं को मजबूत किया जा रहा है।
श्रम राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि राज्यों से लगभग 1 प्रतिशत उपकर (cess) एकत्र किया जाता है, जो करीब 15,000 करोड़ रुपये होता है और इसका उपयोग श्रमिक कल्याण योजनाओं में किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में लाभ वितरण में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनकी जांच की जाएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि 3 मई को डोड्डाबल्लापुर में 100 बिस्तरों वाले ESIC अस्पताल का उद्घाटन किया जाएगा, जिससे श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल श्रमिकों को मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर और स्वास्थ्य किट प्रदान की जा रही हैं।
श्रम दिवस समारोह को संबोधित करते हुए शोभा करंदलाजे ने कहा कि स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी कई श्रम कानून ब्रिटिश काल के हैं, जिन्हें आधुनिक जरूरतों के अनुसार बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी संस्कृति और कल्याणकारी दृष्टिकोण पर आधारित श्रम कानूनों की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य सभी श्रमिकों के लिए समान काम के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, ESI और पेंशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करना है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत श्रमिक ESI और EPF जैसी योजनाओं से बाहर हैं, जिनमें अधिकतर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को तो सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र के श्रमिक अभी भी वंचित हैं। सरकार का प्रयास है कि इन योजनाओं का दायरा बढ़ाकर सभी श्रमिकों को इसका लाभ दिया जाए, ताकि सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत और व्यापक बन सके।





