कर्नाटक

CBI ने वाल्मीकि कॉर्पोरेशन फंड घोटाले में चार्जशीट दाखिल की

Kavita2
3 Jun 2026 11:36 AM IST
CBI ने वाल्मीकि कॉर्पोरेशन फंड घोटाले में चार्जशीट दाखिल की
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Karnataka कर्नाटक: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMVSTDCL) के फंड की कथित हेराफेरी मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में पूर्व शेड्यूल्ड कास्ट वेलफेयर मंत्री बी. नागेंद्र समेत कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

CBI की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले में कॉर्पोरेशन के फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में अवैध रूप से करीब 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

एजेंसी ने अपनी जांच में यह भी खुलासा किया कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन के फंड का उपयोग कर एक बेनामी कार भी खरीदी गई थी। यह कार कथित तौर पर घोटाले से जुड़े पैसों से फंड की गई थी। CBI का कहना है कि यह पूरा मामला संगठित वित्तीय हेराफेरी की ओर इशारा करता है।

CBI ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसने अपनी जांच पूरी कर ली है और तीन अलग-अलग संस्थानों से जुड़े मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। इनमें KMVSTDCL, ST वेलफेयर डिपार्टमेंट और कर्नाटक जर्मन टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शामिल हैं। इन सभी मामलों में उस समय के मंत्री बी. नागेंद्र को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला बेंगलुरु के एमजी रोड स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की शाखा में दर्ज एक शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था। इस शिकायत में बैंक अधिकारियों सहित अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।

CBI अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई, जिससे कथित गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में विभिन्न स्तरों पर फंड के दुरुपयोग और अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं।

इस चार्जशीट के दाखिल होने के बाद मामला अब अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत चलेगा। यदि आरोप साबित होते हैं तो इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

इस घोटाले ने कर्नाटक की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बता रही हैं।

CBI ने कहा है कि मामले की आगे भी जांच जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सबूत और गवाहों को शामिल किया जाएगा।

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