कर्नाटक

कावेरी विवाद: कर्नाटक को मिली अस्थायी राहत

Kavita2
15 July 2026 4:24 PM IST
कावेरी विवाद: कर्नाटक को मिली अस्थायी राहत
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बेंगलुरु : मानसून की कमी और जल संकट के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में कर्नाटक को फिलहाल अस्थायी राहत मिली है। कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की बैठक में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए तत्काल पानी छोड़ने का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है।

कावेरी जल प्रबंधन से जुड़ी 138वीं बैठक बुधवार को नई दिल्ली में कावेरी जल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की गई। बैठक में कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी स्थिति और तर्क रखे।

बैठक के दौरान कर्नाटक ने राज्य में मानसून की कमी और जलाशयों में घटते जल भंडारण का मुद्दा उठाया। राज्य सरकार ने कहा कि इस समय उपलब्ध पानी का इस्तेमाल सबसे पहले पेयजल जरूरतों और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। कर्नाटक ने तर्क दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में तमिलनाडु के लिए अतिरिक्त पानी छोड़ना संभव नहीं है।

कर्नाटक के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बारिश की कमी के कारण राज्य के कई जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है। ऐसे में राज्य के सामने अपने नागरिकों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है।

बैठक में तमिलनाडु ने भी अपनी मांग रखी। तमिलनाडु का कहना है कि कावेरी जल बंटवारे से जुड़े तय नियमों के अनुसार उसे निर्धारित मात्रा में पानी मिलना चाहिए। राज्य ने कर्नाटक से पानी जारी करने की मांग की है ताकि किसानों को खेती, खासकर धान की फसल के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

हालांकि, बैठक में कर्नाटक को तत्काल पानी छोड़ने का कोई सख्त आदेश नहीं दिया गया। इससे कर्नाटक सरकार को कुछ राहत मिली है। लेकिन कावेरी जल विवाद का स्थायी समाधान अभी भी नहीं निकल पाया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर फिर से चर्चा हो सकती है।

कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों राज्यों के लाखों किसान सिंचाई के लिए इस नदी पर निर्भर हैं। हर साल मानसून की स्थिति के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद सामने आता रहा है।

कर्नाटक का कहना है कि कम बारिश के कारण इस बार हालात अलग हैं और राज्य को अपने जल संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना होगा। राज्य सरकार का तर्क है कि पहले स्थानीय जरूरतों को पूरा करना जरूरी है।

वहीं, तमिलनाडु लगातार यह मांग करता रहा है कि कावेरी जल समझौते और न्यायाधिकरण के फैसलों के अनुसार उसे पानी मिलना चाहिए। राज्य सरकार का कहना है कि पानी की कमी से किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी विवाद केवल पानी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों की कृषि और अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। मानसून में कमी आने पर यह विवाद और संवेदनशील हो जाता है।

कावेरी जल प्रबंधन समिति की बैठक में किसी तत्काल फैसले के नहीं आने के बाद अब सभी की नजरें आगे की स्थिति पर हैं। अगर बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ सकता है।

फिलहाल कर्नाटक ने राहत की सांस ली है, लेकिन कावेरी जल विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दोनों राज्यों को आगे भी जल उपलब्धता, किसानों की जरूरतों और तय नियमों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।

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