कर्नाटक

कुद्रेमुख नेशनल पार्क के ESZ में निर्माण उल्लंघन का मामला, तीन रिसॉर्ट्स को नोटिस जारी

Kavita2
11 July 2026 10:48 AM IST
कुद्रेमुख नेशनल पार्क के ESZ में निर्माण उल्लंघन का मामला, तीन रिसॉर्ट्स को नोटिस जारी
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मंगलुरु : कर्नाटक के प्रसिद्ध कुद्रेमुख नेशनल पार्क के इको सेंसिटिव जोन (ESZ) में कथित तौर पर निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर वन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पार्क प्रशासन ने संरक्षित क्षेत्र के आसपास स्थित तीन रिसॉर्ट्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन रिसॉर्ट्स पर आरोप है कि उन्होंने इको सेंसिटिव जोन में निर्माण गतिविधियों के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। विभाग अब यह जांच कर रहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों में पर्यावरणीय मानकों और अनुमति प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं।

डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (DCF) एम. शिवरामबाबू ने बताया कि करकला और बेलथांगडी रेंज में स्थित रिसॉर्ट्स को हाल ही में नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग फिलहाल संबंधित संस्थानों के जवाब का इंतजार कर रहा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, जिन रिसॉर्ट्स को नोटिस भेजा गया है, उनमें से एक पहले से ही संचालित हो रहा है, जबकि दूसरे रिसॉर्ट से जुड़ी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया।

इको सेंसिटिव जोन में निर्माण पर विशेष निगरानी

इको सेंसिटिव जोन ऐसे क्षेत्र होते हैं, जहां पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर विशेष नियम लागू किए जाते हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी बड़े निर्माण कार्य के लिए संबंधित विभागों से अनुमति लेना जरूरी होता है।

कुद्रेमुख नेशनल पार्क जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां कई दुर्लभ वनस्पतियां और वन्यजीव पाए जाते हैं। यही कारण है कि पार्क के आसपास के इलाकों में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर वन विभाग लगातार नजर रखता है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ी सख्ती

वन अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित क्षेत्रों के आसपास अनियंत्रित निर्माण से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।

इसी को देखते हुए विभाग समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण करता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करता है। अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

रिसॉर्ट संचालकों से मांगा जवाब

वन विभाग ने संबंधित रिसॉर्ट संचालकों को नोटिस जारी कर निर्माण और संचालन से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा है। इसमें निर्माण की अनुमति, जमीन से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी मांगी जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

स्थानीय स्तर पर भी उठते रहे हैं सवाल

कुद्रेमुख क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी इलाकों के कारण यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसके चलते कई जगहों पर होमस्टे और रिसॉर्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं कि पर्यटन के विस्तार के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि निर्माण गतिविधियां नियमों के अनुरूप नहीं होंगी तो इसका असर लंबे समय में पर्यावरण पर पड़ सकता है।

आगे की कार्रवाई जवाब के बाद

फिलहाल वन विभाग ने तीनों रिसॉर्ट्स से जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि जवाब मिलने और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित रिसॉर्ट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि सभी आवश्यक अनुमति और दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो मामले को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

कुद्रेमुख नेशनल पार्क प्रशासन की यह कार्रवाई संरक्षित क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाए रखना इस क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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