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आईएएस विकास मरमत का तबादला
अमरावती: बेंगलुरु के एक पब में पुलिसकर्मियों से कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में घिरे आईएएस अधिकारी विकास मरमत का आंध्र प्रदेश सरकार ने तबादला कर दिया है। कुप्पम एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी काडा के परियोजना निदेशक पद पर तैनात मरमत को अगली पदस्थापना के लिए सामान्य प्रशासन विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनके और तीन अन्य लोगों के खिलाफ बेंगलुरु में आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद यह कदम उठाया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है।
विकास मरमत आंध्र प्रदेश कैडर के 2019 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सरकार ने बुधवार को उन्हें वर्तमान पद से स्थानांतरित करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध किया। चित्तूर के जिलाधिकारी को काडा में प्रभारी परियोजना निदेशक की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मुख्य सचिव से घटना के संबंध में विस्तृत जांच और रिपोर्ट मांगी थी। तबादले की कार्रवाई के बाद मरमत की नई जिम्मेदारी तय होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
विवाद बेंगलुरु के रेजिडेंसी रोड स्थित एक बार और रेस्तरां में देर रात पुलिस निरीक्षण के दौरान हुआ था। घटनाक्रम नौ अक्टूबर की रात से दस अक्टूबर की तड़के का है। पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम रात करीब डेढ़ बजे वहां पहुंची थी। निरीक्षक अरुण सालुंखे के नेतृत्व में टीम शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों की जांच कर रही थी। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की उम्र की पुष्टि के लिए पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे जा रहे थे।
आरोप है कि जांच के दौरान मरमत और उनके साथ मौजूद लोगों का पुलिस से विवाद हो गया। उनके खिलाफ पुलिसकर्मियों को अपशब्द कहने, धमकाने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ विवरणों में मरमत पर निरीक्षक को थप्पड़ मारने का आरोप भी है। इस घटनाक्रम को लेकर कब्बन पार्क थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में बताए गए आरोपों को अभी न्यायालय में साबित होना बाकी है।
मरमत के अलावा अभय उदय सिंह, नीतीश और रोशन के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है। अभय उदय सिंह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े बताए गए हैं। नीतीश प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग संस्थान से जुड़े हैं, जबकि रोशन बाउंसर बताया गया है। मामले में मरमत को मुख्य आरोपी और बाकी लोगों को सह आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, संबंधित लोगों ने अगली सुबह अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी थी।
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। उसमें अधिकारी और उनके साथ मौजूद लोगों की पुलिसकर्मियों से बहस तथा अपशब्द कहने की बात सामने आई। शुरुआती विवरणों में पहचान पत्र मांगे जाने को विवाद की वजह बताया गया। वहीं, प्राथमिकी से संबंधित जानकारी में पुलिस निरीक्षण के दौरान टकराव और ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के आरोपों का उल्लेख है। घटना के अलग-अलग हिस्सों के बारे में सामने आए दावों की पुष्टि जांच के आधार पर होगी।
प्रकरण सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश सरकार के स्तर पर भी इसकी समीक्षा शुरू हुई। मुख्यमंत्री नायडू ने मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। उस समय उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार घटना और अधिकारी के आचरण के संबंध में तथ्य जुटा रही थी। इसके बाद तबादले का निर्णय सामने आया। काडा का मुख्यालय जिस कुप्पम क्षेत्र से जुड़ा है, वह मुख्यमंत्री नायडू का विधानसभा क्षेत्र भी है।
मरमत को जुलाई 2024 में काडा में पदस्थ किया गया था। इससे पहले वह नेल्लोर नगर निगम के आयुक्त रहे थे और अप्रैल 2023 में उन्होंने वहां कार्यभार संभाला था। वह ग्राम और वार्ड सचिवालय निदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर भी काम कर चुके हैं। राजस्थान के मूल निवासी मरमत ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उनकी पूर्व जिम्मेदारियों में वाईएसआर कडप्पा जिले में प्रशिक्षु सहायक कलेक्टर और श्रीकाकुलम में सब कलेक्टर के रूप में कार्य करना शामिल है।
काडा में उनके कार्यकाल के दौरान आवास, ग्रामीण विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी पहल की गई थीं। इनमें सड़क चौड़ीकरण और जलनिकासी संबंधी काम भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, मौजूदा विवाद उनके प्रशासनिक कार्यों से अलग बेंगलुरु में हुए कथित घटनाक्रम और पुलिस की शिकायत से संबंधित है। तबादले के बाद आगे की विभागीय प्रक्रिया तथा आपराधिक मामले की जांच की स्थिति पर नजर रहेगी।
मामले ने राजनीतिक प्रतिक्रिया भी पैदा की है। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस ने नायडू सरकार पर अधिकारी को संरक्षण देने का आरोप लगाया था और जवाबदेही की मांग की थी। अब सरकार ने अधिकारी को वर्तमान पद से स्थानांतरित कर दिया है। फिलहाल पुष्ट प्रशासनिक कार्रवाई तबादला और सामान्य प्रशासन विभाग में रिपोर्ट करने का निर्देश है। इसे निलंबन, बर्खास्तगी या आपराधिक आरोपों में दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
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