
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए गए बड़े पैमाने के पौधारोपण अभियान को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार और बृहत बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) की ओर से चलाए गए इस अभियान में 15 लाख पौधे (1.5 मिलियन) लगाने का दावा किया गया था, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह मिली।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे केवल प्रचार का माध्यम बताया है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि अभियान के तहत लगाए गए ज्यादातर पौधे अब सूख चुके हैं और यह कार्यक्रम केवल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
BDA ने जनता के साथ मिलकर चलाया था अभियान
बेंगलुरु में हरियाली बढ़ाने के लिए BDA और शहर प्रशासन ने आम लोगों की भागीदारी के साथ पौधारोपण अभियान शुरू किया था। इस अभियान में मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जो कम जगह में अधिक संख्या में पौधे लगाने और तेजी से हरियाली विकसित करने के लिए जानी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान में बड़ी संख्या में नागरिकों, स्वयंसेवकों और संस्थाओं ने हिस्सा लिया। सरकार ने इसे पर्यावरण संरक्षण और शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद
15 लाख पौधे लगाने के अभियान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने के बाद सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। अधिकारियों का कहना था कि यह केवल सरकार की पहल नहीं बल्कि आम लोगों की भागीदारी से हासिल किया गया रिकॉर्ड है।
लेकिन विपक्ष ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि अभियान के बाद पौधों की देखभाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और बड़ी संख्या में पौधे खराब हो गए।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह अभियान वास्तविक पर्यावरण सुधार से ज्यादा प्रचार हासिल करने के लिए चलाया गया था।
BDA ने आरोपों को किया खारिज
BJP के आरोपों के बाद BDA और शहर प्रशासन के अधिकारियों ने जवाब दिया। BDA अध्यक्ष एन.ए. हैरिस ने कहा कि यह अभियान किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की स्वैच्छिक भागीदारी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधे समय के साथ बड़े होंगे और इससे बेंगलुरु के पर्यावरण को काफी लाभ मिलेगा।
हैरिस ने दावा किया कि जब ये पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाएंगे, तो ये हर साल शहर को बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे।
"यह हजारों लोगों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड है"
BDA अध्यक्ष ने कहा कि पौधारोपण अभियान को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इस अभियान में आम नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा कि पौधों की देखभाल और उनके विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मियावाकी पद्धति पर जोर
इस अभियान में इस्तेमाल की गई मियावाकी तकनीक शहरी क्षेत्रों में छोटे स्थानों पर घने जंगल विकसित करने के लिए अपनाई जाती है। इसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं, जो तेजी से बढ़ने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में प्रदूषण, ट्रैफिक और घटते हरित क्षेत्र के बीच इस तरह के अभियान को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बना राजनीतिक बहस का केंद्र
बेंगलुरु में हरियाली बढ़ाने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। जहां सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी सफलता और पौधों की स्थिति पर सवाल उठा रहा है।
BJP का कहना है कि किसी भी पौधारोपण अभियान की सफलता केवल संख्या से नहीं बल्कि पौधों के जीवित रहने और उनके बड़े होने से तय होती है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि अभियान के तहत लगाए गए पौधों की निगरानी की जा रही है और आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
आगे निगरानी पर रहेगा जोर
अधिकारियों के अनुसार, अब सबसे बड़ी चुनौती लगाए गए पौधों की देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करना है। पौधों को नियमित पानी, सुरक्षा और उचित देखरेख मिलने से ही यह अभियान अपने वास्तविक उद्देश्य को हासिल कर पाएगा।
फिलहाल 15 लाख पौधों का यह अभियान पर्यावरणीय उपलब्धि के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन चुका है। आने वाले समय में पौधों की स्थिति और उनकी वृद्धि इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना होगी।





