कर्नाटक

Gadag में बोम्मई का बयान, कांग्रेस नेतृत्व और ‘हाईकमान’ पर उठाए सवाल

Harrison
3 May 2026 9:59 PM IST
Gadag में बोम्मई का बयान, कांग्रेस नेतृत्व और ‘हाईकमान’ पर उठाए सवाल
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के Gadag में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद Basavaraj Bommai ने कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व ढांचे पर टिप्पणी करते हुए संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी शीर्ष नेतृत्व के सीमित दायरे में लिए जाते हैं।
रिपोर्टरों से बातचीत के दौरान बोम्मई ने कहा कि पार्टी में यह स्पष्ट नहीं है कि असली “हाईकमान” कौन है। उनके अनुसार, कई बड़े निर्णय Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi के भरोसे पर निर्भर रहते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया केंद्रीकृत दिखाई देती है।
बोम्मई ने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेता और राज्य नेतृत्व अलग-अलग स्तर पर निर्णयों का हवाला देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में Siddaramaiah और DK Shivakumar जैसे नेता अक्सर राष्ट्रीय अध्यक्ष Mallikarjun Kharge का नाम लेते हैं, जबकि खड़गे स्वयं कई अहम मुद्दों पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के विचारों को प्राथमिकता देते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक हलकों
में कांग्रेस की संगठनात्मक संरचना और निर्णय प्रक्रिया पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में नेतृत्व की स्पष्टता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, जिससे निर्णयों में पारदर्शिता और स्थिरता पर सवाल उठते हैं।
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर समय-समय पर इस तरह की चर्चाएं और राजनीतिक बयानबाजी होती रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कर्नाटक की राजनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है। राज्य में सत्ता संतुलन और नेतृत्व को लेकर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं होती रही हैं।
बोम्मई के बयान के बाद राजनीतिक माहौल में फिर से कांग्रेस की आंतरिक संरचना को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल अक्सर कांग्रेस में निर्णय प्रक्रिया को केंद्रीकृत बताकर सवाल उठाते रहे हैं।
फिलहाल, इस बयान ने कर्नाटक की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है, जहां नेतृत्व, संगठन और निर्णय लेने की प्रक्रिया एक बार फिर केंद्र में आ गई है।
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