कर्नाटक

BMIC किसानों को मिलेगा प्लॉट दो महीने में प्रक्रिया पूरी

Kavita2
4 Sept 2026 11:19 AM IST
BMIC किसानों को मिलेगा प्लॉट दो महीने में प्रक्रिया पूरी
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बेंगलुरु। बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) परियोजना के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों के हित में कर्नाटक सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उप मुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने बताया कि कैबिनेट बैठक में बिदादी जोन के 1,453 किसानों को प्लॉट आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

डॉ. परमेश्वर ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह BMIC परियोजना से जुड़े मामलों के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन भी हैं। सब-कमेटी ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और अब किसानों को प्लॉट देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

आठ बैठकों के बाद लिया गया फैसला

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि BMIC से जुड़े किसानों के मामलों को सुलझाने के लिए गठित सब-कमेटी की अब तक आठ बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में जमीन देने वाले किसानों की मांगों, कानूनी पहलुओं और प्लॉट आवंटन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि बिदादी के सेक्टर-A में साइट अलॉटमेंट से जुड़े ज्यादातर मामलों का समाधान कर लिया गया है। अब संबंधित प्रक्रिया को पूरा कर किसानों को उनके हिस्से के प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे।

टोल और अन्य मुद्दे चरणबद्ध तरीके से होंगे हल

डॉ. परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि गुरुवार को कैबिनेट द्वारा लिया गया फैसला केवल साइट अलॉटमेंट से संबंधित है। BMIC परियोजना से जुड़े अन्य विषयों जैसे टोल कलेक्शन, टाउनशिप विकास, जंक्शन और कनेक्टिंग सड़कों से जुड़े मामलों को चरणबद्ध तरीके से सुलझाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को एक साथ हल करना संभव नहीं है, इसलिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग विषयों पर काम कर रही है।

जमीन देने वाले किसानों को मिलेगा लाभ

BMIC परियोजना के लिए कई किसानों ने अपनी जमीन उपलब्ध कराई थी। लंबे समय से वे पुनर्वास और परियोजना से मिलने वाले लाभों को लेकर अपनी मांगें उठा रहे थे।

सरकार के इस फैसले से बिदादी क्षेत्र के उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। प्लॉट मिलने से उन्हें परियोजना में भागीदारी और आर्थिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।

फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बाद दी गई थी जमीन

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि जब किसानों ने फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने के बाद अपनी जमीन दी थी, तब किसी तरह का विरोध नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि यह फैसला NICE कंपनी और जिला कलेक्टर स्तर पर हुए समझौते के आधार पर लिया गया था। कंपनी भी किसानों को प्लॉट देने के लिए सहमत थी, लेकिन यह प्रावधान मूल एग्रीमेंट का हिस्सा नहीं होने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई।

देरी के कारणों पर भी दिया जवाब

डॉ. परमेश्वर ने बताया कि प्लॉट आवंटन में देरी का मुख्य कारण प्रशासनिक और समझौते से जुड़े पहलू रहे। हालांकि, अब सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है और तय समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।

BMIC परियोजना का महत्व

बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर कर्नाटक की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य बेंगलुरु और मैसूर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

इस परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से विकास की संभावनाएं हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, टाउनशिप और औद्योगिक गतिविधियों के कारण आसपास के इलाकों में रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार की प्राथमिकता किसानों के हित

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ जमीन देने वाले किसानों के हितों की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जिन लोगों ने विकास कार्यों के लिए योगदान दिया है, उन्हें उचित लाभ मिले।

कर्नाटक कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब 1,453 किसानों को प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो महीने के भीतर यह काम पूरा कर लिया जाए। इससे BMIC परियोजना से जुड़े किसानों को लंबे समय से लंबित मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।

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