कर्नाटक

सिरसी में नेत्रहीन छात्र को SSLC परीक्षा में SST में गलती से अनुपस्थित दर्ज

Kavita2
24 April 2026 12:11 PM IST
सिरसी में नेत्रहीन छात्र को SSLC परीक्षा में SST में गलती से अनुपस्थित दर्ज
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक स्कूल एग्जामिनेशन एंड असेसमेंट बोर्ड की कथित लापरवाही के चलते एक दिव्यांग छात्रा का भविष्य संकट में पड़ गया है। सिरसी स्थित यूनियन हाई स्कूल की छात्रा लिज़ा खानम, जो देखने में दिक्कत (visually impaired) से प्रभावित हैं, को SSLC परीक्षा के मार्क्स कार्ड में सोशल साइंस विषय के लिए ‘एब्सेंट’ (अनुपस्थित) दिखा दिया गया है, जबकि उन्होंने यह पेपर दिया था।

लिज़ा खानम ने अप्रैल में आयोजित SSLC परीक्षा के सभी छह पेपर दिए थे। उनके प्रदर्शन को स्कूल और परिवार दोनों ने काफी अच्छा बताया है। पांच विषयों में उनके अंक इस प्रकार रहे—पहली भाषा उर्दू में 124 अंक, कन्नड़ में 100 अंक, अंग्रेजी में 92 अंक, अर्थशास्त्र में 98 अंक और राजनीति विज्ञान में 92 अंक। इन अंकों से यह साफ है कि लिज़ा एक मेधावी छात्रा हैं और उन्होंने कई विषयों में बेहतर प्रदर्शन किया है।

लेकिन समस्या तब सामने आई जब जारी किए गए मार्क्स कार्ड में सोशल साइंस विषय में उन्हें अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया। यह वही विषय है जिसमें उन्होंने परीक्षा दी थी। इस गलती के कारण उनका कुल परिणाम और भविष्य दोनों प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।

परिजनों के अनुसार, लिज़ा ने परीक्षा के दौरान सभी नियमों का पालन किया था और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेपर दिया था। इसके बावजूद बोर्ड द्वारा उन्हें ‘एब्सेंट’ दिखाना गंभीर प्रशासनिक त्रुटि है। इस गलती को लेकर परिवार ने कर्नाटक स्कूल एग्जामिनेशन एंड असेसमेंट बोर्ड के प्रति नाराजगी जताई है।

लिज़ा के माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने मेहनत से परीक्षा दी थी और वह अच्छे अंक पाने की उम्मीद कर रही थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि इस तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि को तुरंत ठीक किया जाए ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके और उसका भविष्य प्रभावित न हो।

इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की जांच प्रक्रिया और परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि दिव्यांग छात्रों के मामलों में अधिक संवेदनशीलता और सावधानी की जरूरत है, क्योंकि छोटी सी गलती भी उनके करियर पर बड़ा असर डाल सकती है।

फिलहाल, इस मामले को लेकर बोर्ड की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद गलती को सुधारा जाएगा और छात्रा के परिणाम में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और कई लोग इसे परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता से जोड़कर देख रहे हैं।

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