
मैसूरु: टी. नरसीपुरा में गणेशोत्सव जुलूस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भारतीय जनता पार्टी के भीतर की खींचतान तक पहुंच गया है। इंस्पेक्टर धनंजय को निलंबित करने की मांग को लेकर आयोजित बीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा और पूर्व विधायक एवं पार्टी के शहर अध्यक्ष एल. नागेंद्र आपस में भिड़ गए। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह घटना उस समय हुई जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन का उद्देश्य टी. नरसीपुरा के पुलिस इंस्पेक्टर धनंजय के कथित बयान का विरोध करना था। पार्टी नेताओं का आरोप है कि अधिकारी ने गणेशोत्सव जुलूस और पटाखे फोड़ने को लेकर आपत्तिजनक एवं धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया था। हालांकि अधिकारी के कथित बयान और उसके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
प्रदर्शन के दौरान प्रताप सिम्हा और एल. नागेंद्र एक-दूसरे के पास खड़े दिखाई दिए। वायरल वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार पहले प्रताप सिम्हा ने नागेंद्र को धक्का दिया। इससे नाराज नागेंद्र ने पलटकर सिम्हा को धक्का दिया। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस और कहासुनी होती रही। मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोनों को अलग करने का प्रयास किया।
विवाद बढ़ने के बाद एल. नागेंद्र नाराज दिखाई दिए और प्रताप सिम्हा को खरी-खोटी सुनाते हुए वहां से चले गए। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई इस घटना ने प्रदर्शन के मूल मुद्दे से ध्यान हटाकर बीजेपी के आंतरिक समीकरणों पर केंद्रित कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर समर्थकों और विरोधियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस घटनाक्रम की पुष्टि करने वाली स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच पहले से राजनीतिक तनाव की चर्चा रही है। प्रताप सिम्हा और एल. नागेंद्र को चामराज विधानसभा क्षेत्र से भविष्य में टिकट के दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है। नागेंद्र पहले इस सीट से विधायक रह चुके हैं। वहीं लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद प्रताप सिम्हा के राज्य की राजनीति में सक्रिय होने और चामराज क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने की खबरें सामने आई थीं। कन्नड़ प्रभा
हालांकि प्रदर्शन के दौरान हुई धक्का-मुक्की का वास्तविक कारण टिकट की दावेदारी थी या मौके पर पैदा हुई कोई तात्कालिक असहमति, इस बारे में दोनों नेताओं की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए टिकट विवाद को झगड़े का प्रमाणित कारण मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसे स्थानीय राजनीतिक हलकों में लगाई जा रही अटकल के रूप में ही देखा जा रहा है।
टी. नरसीपुरा गणेशोत्सव जुलूस को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों से गरमाया हुआ है। बीजेपी का आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने आयोजकों से कहा था कि जुलूस को एक धार्मिक स्थल के सामने से नहीं ले जाया जा सकता और वहां पटाखे फोड़ने पर कार्रवाई होगी। पार्टी ने कथित बयान को धार्मिक अधिकारों पर रोक बताते हुए इंस्पेक्टर के निलंबन की मांग की है। दूसरी ओर सरकार और प्रशासन की ओर से त्योहार शांतिपूर्वक मनाने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है।
किसी भी धार्मिक जुलूस का मार्ग तय करते समय स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा, यातायात, पूर्व परंपरा और संवेदनशील स्थानों की स्थिति का ध्यान रखना होता है। आयोजकों पर लगाए गए प्रतिबंधों और निर्देशों की वास्तविक प्रकृति आधिकारिक आदेश या पूरे बयान से ही स्पष्ट हो सकती है। वायरल क्लिप अथवा राजनीतिक आरोप के आधार पर अधिकारी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
बीजेपी नेताओं ने पुलिस पर गणेशोत्सव आयोजकों को डराने का आरोप लगाते हुए टी. नरसीपुरा थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में आर. अशोक के अलावा पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी ने मांग की कि कथित बयान की जांच कर इंस्पेक्टर धनंजय के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।
इस बीच प्रताप सिम्हा और नागेंद्र की धक्का-मुक्की ने विपक्षी दलों को बीजेपी पर निशाना साधने का अवसर दे दिया है। राजनीतिक विरोधी इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व और टिकट को लेकर चल रहे संघर्ष का उदाहरण बता सकते हैं। वहीं बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि वह इस घटनाक्रम को केवल व्यक्तिगत गलतफहमी बताकर शांत कराए या दोनों नेताओं से जवाब मांगे।
प्रताप सिम्हा मैसूरु-कोडागु क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं और स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं। दूसरी ओर एल. नागेंद्र पूर्व विधायक होने के साथ पार्टी की शहर इकाई का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों नेताओं का अपने-अपने समर्थकों के बीच प्रभाव माना जाता है। यही कारण है कि सार्वजनिक मंच पर हुई उनकी बहस को सामान्य विवाद के बजाय पार्टी के अंदर असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
घटना के समय आर. अशोक की मौजूदगी ने मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। वरिष्ठ नेतृत्व के सामने दो प्रमुख नेताओं का एक-दूसरे को धक्का देना पार्टी अनुशासन पर भी सवाल खड़े करता है। अब नजर इस बात पर है कि प्रदेश बीजेपी नेतृत्व वीडियो पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा जाता है या नहीं।
वायरल वीडियो में धक्का-मुक्की दिखाई देती है लेकिन वहां हुई पूरी बातचीत स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वीडियो के आधार पर अपुष्ट संवाद या झगड़े का निश्चित कारण बताने से बचना जरूरी है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इंस्पेक्टर के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के बीच बीजेपी के दोनों नेता सार्वजनिक रूप से उलझ गए और उनका विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।





