
बेंगलुरु। कर्नाटक में शक्ति योजना और सरकारी परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि क्या सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ाना और कर्मचारियों की आजीविका को संकट में डालना ही सरकार का मॉडल है। पार्टी ने आरोप लगाया कि शक्ति योजना की लंबित देनदारियों के कारण परिवहन निगम गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
बीजेपी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सरकार ने परिवहन निगमों को मजबूत बनाने का वादा किया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। पार्टी ने विशेष तौर पर बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन यानी BMTC का मुद्दा उठाया और कहा कि ड्राइवरों, कंडक्टरों और अन्य कर्मचारियों को इस महीने वेतन मिलने को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
हालांकि BMTC प्रबंधन ने वेतन को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को खारिज किया है। निगम के प्रबंध निदेशक रघुनंदन मूर्ति ने कहा है कि कर्मचारियों का आगामी वेतन बिना किसी समस्या के दिया जाएगा और इस मोर्चे पर कोई संकट नहीं है। इस तरह वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारी संगठन और निगम प्रबंधन के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है।
यह विवाद तब और बढ़ा जब परिवहन कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया कि शक्ति योजना के तहत सरकार की ओर से भुगतान में देरी का सीधा असर निगमों की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। संगठन का दावा है कि सरकार को चारों परिवहन निगमों को शक्ति योजना से जुड़ी लगभग 6,500 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करना है। यह दावा कर्मचारी संगठन की ओर से किया गया है और सरकार की ओर से इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शक्ति योजना के तहत महिलाओं को राज्य की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। योजना का खर्च राज्य सरकार वहन करती है और परिवहन निगमों को इसके बदले प्रतिपूर्ति की जाती है। कर्मचारी संगठन का आरोप है कि प्रतिपूर्ति में देरी से निगमों के दैनिक खर्च, रखरखाव और भुगतान व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
कर्मचारी संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों के भविष्य निधि यानी PF और बीमा से जुड़ी राशि का इस्तेमाल दूसरे खर्चों को पूरा करने में किया गया। संगठन के अध्यक्ष जगदीश एचआर ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए रखी जाने वाली रकम को किसी अन्य काम में नहीं लगाया जाना चाहिए। इन आरोपों पर अभी स्वतंत्र जांच या अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
एक और गंभीर मुद्दा बसों के लिए डीजल आपूर्ति से जुड़े बकाये का है। कर्मचारी संगठन ने दावा किया है कि BMTC पर तेल कंपनियों का करीब 650 करोड़ रुपये का डीजल बकाया है। संगठन के मुताबिक निगम को रोजाना करीब 2.5 लाख लीटर डीजल की जरूरत होती है, इसलिए ईंधन भुगतान में देरी संचालन पर सीधा असर डाल सकती है।
निगम की वित्तीय स्थिति को लेकर वाहन रखरखाव का मुद्दा भी उठाया गया है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि बसों के स्पेयर पार्ट्स खरीदने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन धन की कमी के कारण पर्याप्त खरीद नहीं हो पा रही। संगठन ने दावा किया कि इससे बसों के रखरखाव पर असर पड़ रहा है और खराब हालत वाली बसों के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
बीजेपी ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर राजनीतिक हमला किया है। पार्टी का कहना है कि मुफ्त यात्रा योजना को जारी रखने के साथ-साथ सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवहन निगम आर्थिक रूप से सक्षम बने रहें और कर्मचारियों को वेतन, PF, बीमा और अन्य देनदारियां समय पर मिलें।
राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी हाल के दिनों में राजनीतिक बहस तेज हुई है। वित्त विभाग ने सरकार को खर्च में सावधानी बरतने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कहा है कि वित्त विभाग का सुझाव सरकार के हित में है और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर ही योजनाओं पर निर्णय लेना होगा।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य ने अपनी उधारी क्षमता का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है और विभिन्न सरकारी निगम वित्तीय दबाव में हैं। दूसरी ओर सरकार अपनी गारंटी योजनाओं को सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के रूप में पेश करती रही है और कहती है कि इनका मकसद आम परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना है।
शक्ति योजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में शामिल है और इसके तहत महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जा रही है। योजना के समर्थक इसे महिलाओं की आवाजाही और आर्थिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं, जबकि विपक्ष इसके वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा रहा है।
इस बीच परिवहन कर्मचारियों की चिंताएं अलग स्तर पर बनी हुई हैं। वे समय पर वेतन, ग्रेच्युटी, PF, बीमा भुगतान और बसों के रखरखाव के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठन ने दावा किया है कि एक हजार से अधिक कर्मचारियों की ग्रेच्युटी 2023 से लंबित है।
फिलहाल BMTC प्रबंधन ने वेतन भुगतान पर किसी संकट से इनकार किया है, लेकिन शक्ति योजना की लंबित प्रतिपूर्ति, डीजल बकाया और कर्मचारियों की देनदारियों से जुड़े आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि कर्नाटक सरकार परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को लेकर क्या कदम उठाती है और कर्मचारी संगठनों की ओर से उठाए गए PF, बीमा, ग्रेच्युटी तथा ईंधन भुगतान से जुड़े आरोपों पर क्या जवाब देती है।





