कर्नाटक

मंत्री प्रियंक खारगे के बयान पर BJP विधायक महेश तेंगिन्काई का पलटवार

SHIDDHANT
16 Oct 2025 8:30 PM IST
मंत्री प्रियंक खारगे के बयान पर BJP विधायक महेश तेंगिन्काई का पलटवार
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Bengaluru बेंगलुरु: कर्नाटक में राजनीतिक बयानबाजी का नया मामला सामने आया है। BJP के विधायक महेश तेंगिन्काई ने कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खारगे के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी है। तेंगिन्काई ने कहा कि मंत्री को पहले यह सोचना चाहिए कि उन्होंने क्या लिखा और कहा। महेश तेंगिन्काई ने अपने बयान में RSS के 100 साल पूरे होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “RSS ने हाल ही में 100 वर्ष पूरे किए हैं, और पूरे देश में उत्सव मनाया गया। इससे उन्हें (प्रियंक खारगे और उनके समर्थकों) झटका लगा, यही कारण है कि उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की।”
BJP विधायक ने यह भी कहा कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण और समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं। उनका मानना है कि मंत्री को अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी का ध्यान रखते हुए बयान देना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयानबाजी कर्नाटक में चुनावी मौसम और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच आई है। प्रियंक खारगे और उनके समर्थक अक्सर भाजपा और RSS के खिलाफ सार्वजनिक बयान देते रहे हैं। वहीं BJP नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक संदेश और मतदाताओं पर प्रभाव डालने की कोशिश होती है।
महेश तेंगिन्काई ने कहा कि RSS का 100वां वर्षगांठ राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया था और इसे सकारात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रूप में देखा गया। उन्होंने मंत्री को यह याद दिलाया कि ऐसे विषयों पर असंवेदनशील और आलोचनात्मक टिप्पणियाँ राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से अनुचित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में बयानबाजी की तीव्रता को फिर से उजागर किया है। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में इस बयान पर बहस तेज हो गई है। कई राजनीतिक पार्टी समर्थक इसे अपने-अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक नेताओं के बयान न केवल चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं पर भी असर डाल सकते हैं। दोनों पक्षों के नेताओं की बयानबाजी से जनता में गहमागहमी और राजनीतिक चर्चा लगातार बढ़ रही है।BJP विधायक महेश तेंगिन्काई ने अंत में यह भी कहा कि मंत्री को अपने बयान में सावधानी और संतुलन बनाए रखना चाहिए, ताकि राजनीतिक और सामाजिक विवाद न बढ़े। उन्होंने यह भी जोर दिया कि RSS जैसी संस्थाओं के इतिहास और योगदान को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
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